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पत्नी के समझौते से पीछे हटने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा का मामला रद्द किया, पति को मिला तलाक

Shivam
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समझौते के उल्लंघन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा का मामला रद्द कर दिया और अपूरणीय विघटन और कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग का हवाला देते हुए तलाक मंजूर कर दिया। - धनंजय राठी बनाम रुचिका राठी

पत्नी के समझौते से पीछे हटने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा का मामला रद्द किया, पति को मिला तलाक

दिल्ली के एक वैवाहिक विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पत्नी द्वारा दायर घरेलू हिंसा (DV) की कार्यवाही को रद्द कर दिया और पति को तलाक प्रदान कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता (mediation) से हुए समझौते से पीछे हटना बिना ठोस कारण के स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला धनंजय राठी और रुचिका राठी के बीच वैवाहिक विवाद से जुड़ा है, जिनकी शादी वर्ष 2000 में हुई थी। समय के साथ रिश्ते में मतभेद बढ़े और दोनों 2022-23 के आसपास अलग रहने लगे। इसके बाद मामला फैमिली कोर्ट पहुँचा, जहाँ मध्यस्थता के माध्यम से 16 मई 2024 को एक विस्तृत समझौता हुआ।

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इस समझौते में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक लेने और सभी विवाद खत्म करने का फैसला किया। पति ने समझौते के तहत पहली किस्त के रूप में ₹75 लाख, कार के लिए ₹14 लाख और पत्नी को जेवर भी सौंप दिए। वहीं पत्नी ने भी बड़ी राशि ट्रांसफर कर अपनी शर्तों का पालन किया।

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लेकिन मामला तब पलट गया जब पत्नी ने दूसरी मोशन पर सहमति देने से इनकार कर दिया और बाद में घरेलू हिंसा का केस दर्ज कर दिया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम को ध्यान से परखा और पाया कि पत्नी ने समझौते के लाभ लेने के बाद उससे पीछे हटने का प्रयास किया।

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बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा,

“मध्यस्थता से हुआ समझौता एक गंभीर प्रक्रिया है, इसे मानने के बाद उससे पीछे हटना बिना उचित कारण के स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पत्नी द्वारा लगाए गए अतिरिक्त आरोप जैसे भारी मात्रा में जेवर और गोल्ड बिस्किट किसी भी दस्तावेज़ या समझौते में दर्ज नहीं थे। इन दावों को अदालत ने अविश्वसनीय माना।

इसके अलावा, अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि वास्तव में घरेलू हिंसा हुई थी, तो इतने लंबे समय बाद शिकायत क्यों दर्ज की गई।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि घरेलू हिंसा की शिकायत में ठोस और स्पष्ट आरोप होना जरूरी है। इस मामले में शिकायत सामान्य और अस्पष्ट पाई गई।

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बेंच ने कहा,

“सिर्फ नाम लेकर आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है, ऐसे मामलों को शुरुआत में ही समाप्त किया जाना चाहिए।”

कोर्ट ने माना कि यह कार्यवाही समझौते से पीछे हटने के बाद शुरू की गई और यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

कोर्ट ने यह भी देखा कि दोनों पक्ष कई वर्षों से अलग रह रहे हैं और उनके बीच संबंध पूरी तरह टूट चुका है। किसी भी तरह की सुलह की संभावना नहीं बची है।

इसी आधार पर अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए तलाक की डिक्री पास की।

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बेंच ने कहा,

“जब वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुका हो, तो उसे कानूनी रूप से खत्म करना ही न्यायसंगत है।”

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने पति की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। घरेलू हिंसा की कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया और दोनों के बीच विवाह को भंग कर दिया गया।

साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि पति शेष तय राशि का भुगतान करे और समझौते की बाकी शर्तों को पूरा किया जाए। पत्नी द्वारा हाईकोर्ट में जमा की गई ₹89 लाख की राशि उसे वापस करने का आदेश भी दिया गया।

Case Details

Case Title: Dhananjay Rathi vs Ruchika Rathi

Case Number: Criminal Appeal No. 1924 of 2026

Judge: Justice Vijay Bishnoi and Justice Rajesh Bindal

Decision Date: 13 April, 2026

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