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पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी मान्य नहीं: मद्रास हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन पर दावा खारिज किया

Shivam
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तमिलनाडु के महालेखाकार बनाम एम. राधाकृष्णन और अन्य - मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि यदि विवाह पहली पत्नी के जीवित रहते हुए हुआ हो तो दूसरी पत्नी पारिवारिक पेंशन के लिए पात्र नहीं है, और पहले के आदेश को रद्द कर दिया।

पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी मान्य नहीं: मद्रास हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन पर दावा खारिज किया

मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि पहली पत्नी के रहते की गई दूसरी शादी कानूनन शून्य है और ऐसी शादी के आधार पर फैमिली पेंशन का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने अकाउंटेंट जनरल (AG) की अपील मंजूर करते हुए उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दूसरी पत्नी का नाम पेंशन रिकॉर्ड में जोड़ने की अनुमति दी गई थी। यह फैसला 27 जनवरी 2026 को सुनाया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला तमिलनाडु के एक सेवानिवृत्त ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर एम. राधाकृष्णन से जुड़ा है। वे 31 जुलाई 2007 को रिटायर हुए और पेंशन ले रहे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने अपनी पहली पत्नी के जीवित रहते 27 मई 1992 को दूसरी शादी कर ली थी। बाद में उन्होंने 2009 में आवेदन देकर दोनों पत्नियों के नाम फैमिली पेंशन के लिए नामांकन में जोड़ने की मांग की।

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यह प्रस्ताव जिला प्रशासन से होते हुए अकाउंटेंट जनरल के पास पहुंचा, लेकिन AG ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी कानून के तहत मान्य नहीं है। इसके खिलाफ राधाकृष्णन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। बाद में, पहली पत्नी की 10 अगस्त 2020 को मृत्यु हो गई और याचिकाकर्ता ने दलील दी कि अब दूसरी पत्नी का नाम जोड़ा जा सकता है।

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अदालत की टिप्पणियां

डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस एस. एम. सुब्रमणियम और जस्टिस सी. कुमारप्पन शामिल थे, ने तमिलनाडु पेंशन नियम और सरकारी सेवक आचरण नियमों का विस्तार से हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि फैमिली पेंशन एक कल्याणकारी योजना जरूर है, लेकिन यह नियमों के तहत ही दी जा सकती है।

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अदालत ने साफ शब्दों में कहा,

“पहली पत्नी के जीवित रहते की गई दूसरी शादी शून्य है। पहली पत्नी की बाद में हुई मृत्यु इस तथ्य को नहीं बदल सकती।” बेंच ने यह भी याद दिलाया कि सरकारी सेवकों के लिए दूसरी शादी करना आचरण नियमों के तहत गंभीर कदाचार माना जाता है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि पेंशन सामान्य तौर पर केवल “कानूनी रूप से विवाहित पत्नी” को ही मिल सकती है। फैसले में यह भी बताया गया कि पेंशन नियमों में कुछ खास परिस्थितियों जैसे 1955 से पहले की प्रथा या मुस्लिम कानून के तहत ही दूसरी शादी को मान्यता दी गई है, जो इस मामले में लागू नहीं होती।

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पहले सिंगल जज ने एक अन्य मामले का हवाला देते हुए “विवाह की अनुमानित वैधता” के सिद्धांत पर भरोसा किया था और याचिका स्वीकार कर ली थी। लेकिन अपील में डिवीजन बेंच ने कहा कि उस आदेश में प्रासंगिक पेंशन नियमों पर ठीक से विचार नहीं किया गया।

फैसला

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि दूसरी शादी, जो पहली पत्नी के रहते हुई थी, कानूनन शून्य है और उसके आधार पर फैमिली पेंशन का कोई अधिकार नहीं बनता। बेंच ने कहा,

“मृत्यु के बाद स्थिति नहीं बदलती। जो विवाह शुरू से ही अमान्य है, वह पेंशन के लिए वैध आधार नहीं हो सकता।”

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 2 नवंबर 2021 का पुराना आदेश रद्द कर दिया और अकाउंटेंट जनरल की अपील मंजूर कर ली। मामले में किसी तरह की लागत नहीं लगाई गई और संबंधित याचिका भी बंद कर दी गई।

Case Title:- The Accountant General, Tamil Nadu vs M. Radhakrishnan & Another

Case Number:- Writ Appeal (WA) No. 1072 of 2022

Date of Judgment:- 27 January 2026

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