Logo

भुगतान क्षेत्र में 'पे' सामान्य शब्द है: मद्रास हाई कोर्ट ने बंडलपे के खिलाफ फोनपे के ट्रेडमार्क केस को खारिज किया

Shivam Y.

मद्रास हाई कोर्ट ने फोनपे के ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले को खारिज करते हुए 'पे' को भुगतान सेवाओं में सामान्य शब्द बताया। न्यायालय के निर्णय की मुख्य बातें जानें।

Advertisement
भुगतान क्षेत्र में 'पे' सामान्य शब्द है: मद्रास हाई कोर्ट ने बंडलपे के खिलाफ फोनपे के ट्रेडमार्क केस को खारिज किया
Join Telegram

मद्रास हाई कोर्ट ने डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे द्वारा बंडलपे इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति पी. वेल्मुरुगन ने फैसला सुनाते हुए कहा कि "पे" शब्द, जो फोनपे के ब्रांडिंग का प्रमुख हिस्सा है, भुगतान उद्योग में एक सामान्य शब्द है और किसी एक कंपनी का इस पर एकाधिकार नहीं हो सकता।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि "पे" हिंदी शब्द "पे" (भुगतान) का अंग्रेजी रूपांतरण है और यह गूगल पे, पेटीएम, एप्पल पे जैसी कंपनियों द्वारा व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। न्यायालय ने कहा कि फोनपे का इस शब्द पर विशेष अधिकार का दावा कानूनी आधार से रहित है।

Advertisement

विवाद की पृष्ठभूमि

फोनपे ने दावा किया था कि बंडलपे और उसकी सहायक कंपनी लेटपे, "पे" शब्द का उपयोग करके उसके ट्रेडमार्क "फोनपे" की नकल कर रहे हैं। फोनपे के अनुसार, "बंडलपे" और "लेटपे" नाम उसके रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क के साथ भ्रामक समानता रखते हैं, जिससे ग्राहकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।

Read Also - कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इंफोसिस सह-संस्थापक और आईआईएससी संकाय सदस्यों के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम मामले की कार्यवाही पर रोक लगाई

फोनपे ने बताया कि वह 2015 से "फोनपे" ट्रेडमार्क का मालिक है और यह भारत के 48% यूपीआई लेनदेन को संभालता है। उसने मार्च 2023 में बंडलपे को रोकने और छोड़ने का नोटिस भेजा था, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने पर मामला कोर्ट पहुंचा।

बंडलपे ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि उनकी सेवाएं बिल भुगतान और रिचार्ज तक सीमित हैं, जबकि फोनपे यूपीआई आधारित समाधान प्रदान करता है। बंडलपे ने यह भी उजागर किया कि "पे" शब्द भुगतान से जुड़ा एक सामान्य शब्द है और इसे ट्रेडमार्क नहीं बनाया जा सकता।

न्यायमूर्ति वेल्मुरुगन ने कहा,

"'पे' शब्द न तो अद्वितीय है और न ही विशिष्ट। इसका उद्योग-व्यापी उपयोग फोनपे के दावों को खारिज करता है।"

Read Also - कलकत्ता हाई कोर्ट ने संदेशखली गैंग रेप मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की, जांच में देरी पर सख्ती

कोर्ट ने माना कि "बंडल" और "लेट" जैसे उपसर्गों ने बंडलपे के ब्रांड को अलग पहचान दी है। न्यायाधीश ने कहा,

Advertisement

"सैद्धांतिक भ्रम के दावे वास्तविक सबूतों से ऊपर नहीं हो सकते। फोनपे ग्राहकों में वास्तविक भ्रम साबित नहीं कर पाया।"

बंडलपे का ध्यान यूटिलिटी बिल भुगतान और पे-लेटर सुविधाओं पर है, जबकि फोनपे यूपीआई पर केंद्रित है। इस अंतर ने भ्रम की संभावना को कम किया।

फोनपे का "प्रसिद्ध ट्रेडमार्क" घोषित करने का अनुरोध खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि "पे" का प्रतिस्पर्धियों द्वारा उपयोग इसके विशिष्टता के दावे को कमजोर करता है।

फैसले के प्रभाव

यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सामान्य शब्दों पर एकाधिकार नहीं बनाया जा सकता, भले ही कोई ब्रांड उन्हें लोकप्रिय बना दे। स्टार्टअप और फिनटेक कंपनियां "पे" जैसे शब्दों का उपयोग सुरक्षित रूप से कर सकती हैं, बशर्ते उनकी ब्रांडिंग में विशिष्ट तत्व शामिल हों।

Read Also - बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के क्लस्टर स्कूल नीति पर सु ओ मोटू PIL खारिज किया, निर्णय राज्य पर छोड़ा

न्यायमूर्ति वेल्मुरुगन ने टिप्पणी की,

"प्रतिस्पर्धा नवाचार से बढ़ती है, सामान्य शब्दों पर रोक लगाने से नहीं।"

मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय ट्रेडमार्क कानून में एक मिसाल बन गया है, जो ब्रांड सुरक्षा और उद्योग-व्यापी शब्दावली के बीच संतुलन को दर्शाता है। फोनपे के दावों को खारिज कर कोर्ट ने एक प्रतिस्पर्धी बाजार का मार्ग प्रशस्त किया है, जहां सभी खिलाड़ी सामान्य शब्दों का उपयोग कर सकते हैं।

मामला: फोनपे प्राइवेट लिमिटेड बनाम बंडलपे इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य

फोनपे के वकील: श्री पी. गिरिधरन

बंडलपे के वकील: श्री आर. सतीश कुमार

Advertisement

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
CourtBook Mobile App

Recommended Posts