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पोर्टल की तकनीकी खामी से एडमिट कार्ड न मिलने पर राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा के लिए विशेष परीक्षा का निर्देश

Shivam
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श्रेया पांडे बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य - इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए पोर्टल त्रुटि के कारण छात्रा के परीक्षा से वंचित होने के बाद राज्जू भैया विश्वविद्यालय को विशेष बीएससी परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया।

पोर्टल की तकनीकी खामी से एडमिट कार्ड न मिलने पर राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा के लिए विशेष परीक्षा का निर्देश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि केवल तकनीकी त्रुटियों के कारण किसी छात्र के शैक्षणिक भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता। Bsc.(Biology) प्रथम वर्ष की छात्रा को परीक्षा से वंचित किए जाने के मामले में अदालत ने विश्वविद्यालय को विशेष परीक्षा कराने का निर्देश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता श्रेया पांडे ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए प्रयागराज स्थित उर्मिला देवी पीजी कॉलेज में Bsc.(Biology) में दाखिला लिया था। उन्होंने समय पर फीस जमा की और नियमित रूप से पढ़ाई भी की।

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समस्या तब सामने आई जब विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा कार्यक्रम जारी होने के बावजूद उन्हें प्रवेश पत्र (Admit Card) नहीं दिया गया। जांच में पता चला कि विश्वविद्यालय के “समर्थ पोर्टल” पर उनका आवेदन ड्राफ्ट स्थिति में रह गया था।

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कॉलेज ने इस तकनीकी समस्या को लेकर विश्वविद्यालय को समय रहते अवगत कराया था। लगभग 30 छात्रों के रिकॉर्ड अपडेट न होने की सूचना दी गई, जिनमें से 25 के रिकॉर्ड ठीक कर दिए गए, लेकिन याचिकाकर्ता सहित कुछ छात्रों का डेटा अपडेट नहीं हुआ।

अदालत की सुनवाई और अवलोकन

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक सरन की एकल पीठ ने की। अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि छात्रा की ओर से कोई लापरवाही नहीं थी।

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पीठ ने टिप्पणी की,

“जब छात्रा की गलती नहीं है, तो केवल तकनीकी खामी के आधार पर उसे परीक्षा से वंचित करना न्यायसंगत नहीं हो सकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय को इस बात की जानकारी थी कि कुछ छात्रों के रिकॉर्ड पोर्टल पर अपडेट नहीं हो पाए हैं, इसके बावजूद समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

शिक्षा और मौलिक अधिकार

कोर्ट ने पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि परीक्षा में बैठने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार से जुड़ा है।

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पीठ के अनुसार, शिक्षा व्यक्ति के भविष्य की नींव होती है और तकनीकी कारणों से किसी छात्र को पीछे नहीं धकेला जा सकता।

अदालत का निर्णय

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के लिए Bsc.(Biology) प्रथम सेमेस्टर की विशेष परीक्षा दो सप्ताह के भीतर आयोजित करे।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया कि परीक्षा परिणाम उचित समय में घोषित किया जाए और छात्रा के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के पोर्टल पर अपडेट किए जाएं, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रहे।

Case Title: Shreya Pandey vs State of Uttar Pradesh and 2 Others

Case Number: Writ - C No. 43756 of 2025

Date of Order: January 12, 2026

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