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PSC विस्तार पर वेदांता को झटका: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र के फैसले में हस्तक्षेप से किया इनकार

Shivam
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वेदांता लिमिटेड बनाम भारत संघ और अन्य - PSC विस्तार पर वेदांता को राहत नहीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने CB/OS-2 ब्लॉक मामले में केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराया।

PSC विस्तार पर वेदांता को झटका: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र के फैसले में हस्तक्षेप से किया इनकार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने तेल और गैस क्षेत्र से जुड़े एक अहम विवाद में वेदांता लिमिटेड को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने सरकार द्वारा प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) के विस्तार से इनकार करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।

यह मामला गुजरात के सूरत तट के पास स्थित CB/OS-2 ऑफशोर ब्लॉक से जुड़ा है, जहां पिछले ढाई दशकों से पेट्रोलियम संचालन चल रहा था।

मामले की पृष्ठभूमि

Vedanta Limited ने वर्ष 1998 में केंद्र सरकार, Oil and Natural Gas Corporation और अन्य भागीदारों के साथ PSC किया था। यह अनुबंध 25 वर्षों के लिए था, जिसकी अवधि 29 जून 2023 को समाप्त हो गई।

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सरकार की 2017 की नीति के तहत वेदांता ने 28 जून 2021 को समय रहते PSC को 10 वर्ष के लिए बढ़ाने का आवेदन किया। हालांकि, अंतिम निर्णय लंबित रहने के कारण सरकार ने कुछ समय के लिए अंतरिम विस्तार दिया, ताकि तेल उत्पादन बाधित न हो।

सितंबर 2025 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि कंपनी नीति की शर्तों को पूरा नहीं कर पाई है। इसके साथ ही वेदांता को ब्लॉक का संचालन तुरंत ONGC को सौंपने का निर्देश भी दिया गया।

अदालत में वेदांता की दलील

वेदांता ने अदालत में कहा कि उसने सभी नियमों का पालन किया और वर्षों तक बिना किसी शिकायत के संचालन किया। कंपनी का तर्क था कि सरकार ने अपनी ही नीति में तय समय-सीमा का पालन नहीं किया और अचानक PSC विस्तार से इनकार कर दिया।

कंपनी ने “वैध अपेक्षा” (legitimate expectation) का हवाला देते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक संचालन और बार-बार दिए गए अंतरिम विस्तार के बाद उसे उचित सुनवाई मिलनी चाहिए थी।

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वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी,

“सरकार ने कभी भी बकाया या उल्लंघन का मुद्दा नहीं उठाया, लेकिन अब इन्हीं आधारों पर विस्तार से इनकार कर दिया गया।”

केंद्र सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए कानून अधिकारियों ने साफ कहा कि PSC का विस्तार किसी का अधिकार नहीं है। सरकार ने दलील दी कि प्राकृतिक संसाधन देश की जनता के हैं और सरकार केवल उनकी संरक्षक है।

सरकार के अनुसार, 2017 की नीति में यह स्पष्ट है कि यदि शर्तें पूरी न हों तो PSC बढ़ाना जरूरी नहीं।

सरकार ने कहा, “कोई भी निजी कंपनी यह दावा नहीं कर सकती कि उसे संसाधनों का दोहन जारी रखने का स्थायी अधिकार है।”

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने माना कि PSC पूरी तरह अनुबंध आधारित है और इसका विस्तार स्वतः नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि नीति के तहत सरकार को आवेदन का मूल्यांकन करने का पूरा अधिकार है।

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पीठ ने टिप्पणी की,

“प्राकृतिक संसाधनों के मामले में सरकार का विवेकाधिकार व्यापक है और केवल इस आधार पर हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता कि आवेदक लंबे समय से संचालन कर रहा था।”

अदालत ने यह भी माना कि अनुबंध समाप्त होने के बाद कंपनी को संचालन जारी रखने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं रह जाता।

अंतिम फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने वेदांता की याचिका खारिज करते हुए PSC विस्तार से इनकार करने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही ब्लॉक का नियंत्रण ONGC को सौंपने के निर्देश भी प्रभावी रहेंगे।

Case Title: Vedanta Limited v. Union of India & Others

Case Number: W.P.(C) 14738/2025

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