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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना पीड़िता के परिजनों को मुआवजा दोगुना किया, ₹1.18 करोड़ देने का आदेश

Shivam
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शिल्पा जैन (मृतक) अपने कानूनी वारिसों और अन्य के माध्यम से बनाम इंदरजीत जैन और अन्य - पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गृहिणी की आय, दर्द, पीड़ा और भविष्य के चिकित्सा खर्चों को ध्यान में रखते हुए मोटर दुर्घटना मुआवजे को बढ़ाकर ₹1.18 करोड़ कर दिया है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना पीड़िता के परिजनों को मुआवजा दोगुना किया, ₹1.18 करोड़ देने का आदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में मोटर दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई महिला की मृत्यु के बाद उसके परिजनों को मिलने वाले मुआवजे में बड़ा इज़ाफा किया है। न्यायालय ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए ₹58.22 लाख के मुआवजे को बढ़ाकर कुल ₹1.18 करोड़ कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा ने सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला शिल्पा जैन से जुड़ा है, जो 8 अक्टूबर 2014 को हुए एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। दुर्घटना के बाद उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। सिर में गंभीर चोटों के कारण वह पूरी तरह से वेजिटेटिव स्टेट में चली गई थीं और 21 नवंबर 2017 को उनका निधन हो गया।

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परिजनों ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत मुआवजे की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने दिसंबर 2016 में ₹58.22 लाख का मुआवजा तय किया था, लेकिन परिजन इसे अपर्याप्त बताते हुए हाईकोर्ट पहुंचे।

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अपीलकर्ताओं की ओर से कहा गया कि शिल्पा जैन एक गृहिणी थीं और ट्रिब्यूनल ने उनकी आय को बहुत कम आंका। साथ ही, दर्द, पीड़ा, देखभाल और भविष्य की चिकित्सा जरूरतों के लिए दिया गया मुआवजा भी नाकाफी था।

बीमा कंपनी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मुआवजा पहले ही अधिक है, खासकर भविष्य के चिकित्सा खर्च के नाम पर।

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कोर्ट के अहम अवलोकन

हाईकोर्ट ने कहा कि गृहिणी के काम को कम करके नहीं आंका जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

“गृहिणी की भूमिका केवल घरेलू काम तक सीमित नहीं होती, बल्कि परिवार की पूरी व्यवस्था उसी पर टिकी होती है।”

कोर्ट ने शिल्पा जैन की अनुमानित मासिक आय ₹15,000 तय की और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ते हुए 40 प्रतिशत अतिरिक्त आय भी शामिल की। न्यायालय ने यह भी माना कि दुर्घटना के बाद पीड़िता को लगातार देखभाल और अटेंडेंट की जरूरत थी। दर्द और पीड़ा के लिए ₹15 लाख का मुआवजा उचित बताया गया।

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फैसला

सभी तथ्यों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश में संशोधन किया। कोर्ट ने कुल मुआवजा ₹1,18,20,000 तय किया, जिसमें चिकित्सा खर्च, भविष्य के इलाज, अटेंडेंट चार्ज, यातायात खर्च और जीवन की सुविधाओं के नुकसान को शामिल किया गया।

पहले दिए गए मुआवजे को घटाने के बाद, परिजनों को ₹59.98 लाख अतिरिक्त देने का आदेश दिया गया। इस राशि पर दावा दायर करने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी मिलेगा।

कोर्ट ने बीमा कंपनी को दो महीने के भीतर यह राशि जमा करने के निर्देश दिए और इसी के साथ अपील का निपटारा कर दिया।

Case Title: Shilpa Jain (Since Deceased) through LRs & Ors. vs Inderjeet Jain & Ors.

Case Number: FAO-4806-2017 (O&M)

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