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राजस्थान ACB को मिला अधिकार: केंद्र कर्मचारी पर भ्रष्टाचार केस दर्ज कर सकती है, सुप्रीम कोर्ट ने SLP खारिज की

Vivek G.
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नवल किशोर मीना @ एन.के मीना बनाम राजस्थान राज्य, सुप्रीम कोर्ट ने कहा राजस्थान ACB को केंद्रीय कर्मचारी पर PC Act में केस दर्ज कर जांच का अधिकार है, CBI की मंजूरी जरूरी नहीं।

राजस्थान ACB को मिला अधिकार: केंद्र कर्मचारी पर भ्रष्टाचार केस दर्ज कर सकती है, सुप्रीम कोर्ट ने SLP खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम आदेश में साफ कर दिया कि राजस्थान की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को यह अधिकार है कि वह केंद्र सरकार के कर्मचारी के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत मामला दर्ज कर जांच कर सकती है-भले ही आरोपी केंद्रीय सेवा में क्यों न हो। अदालत ने इस मामले में दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला नवल किशोर मीणा @ एन.के. मीणा बनाम राजस्थान राज्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने राजस्थान हाईकोर्ट के 3 अक्टूबर 2025 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

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याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह था कि यदि केंद्र सरकार का कर्मचारी राजस्थान में भ्रष्टाचार के किसी मामले में आरोपी बनता है, तो उसकी जांच केवल CBI कर सकती है, राज्य की ACB नहीं।

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सुनवाई के दौरान अदालत के रिकॉर्ड में बताया गया कि हाईकोर्ट के सामने दो बड़े कानूनी सवाल रखे गए थे-

1. क्या राजस्थान की ACB को केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ PC Act में केस दर्ज करने और जांच करने का अधिकार है, या यह अधिकार सिर्फ CBI के पास है?

2. यदि ACB ने CBI की मंजूरी/सहमति के बिना चार्जशीट दाखिल की, तो क्या वह चार्जशीट वैध मानी जाएगी?

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की पीठ-जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा-ने हाईकोर्ट के निष्कर्षों से सहमति जताई। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने सही दृष्टिकोण अपनाया है और यह कहना गलत है कि सिर्फ CBI ही अभियोजन शुरू कर सकती है।

अदालत ने सुनवाई में यह भी समझाया कि CrPC की धारा 156 के तहत पुलिस को संज्ञेय अपराधों की जांच का अधिकार मिलता है और केवल “विशेष कानून” होने से CrPC की भूमिका खत्म नहीं हो जाती, जब तक कि कानून में अलग प्रक्रिया साफ तौर पर न लिखी हो।

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पीठ ने PC Act की धारा 17 का उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच कौन कर सकता है, यह कानून में तय रैंक (पद) की शर्तों के साथ बताया गया है-लेकिन यह धारा राज्य एजेंसी को रोकती नहीं है।

अदालत ने टिप्पणी की, “PC Act के अपराध राज्य एजेंसी या केंद्रीय एजेंसी-दोनों द्वारा जांचे जा सकते हैं, बशर्ते अधिकारी निर्धारित रैंक का हो।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि CBI का गठन DSPE Act, 1946 के तहत हुआ और बाद में उसे विभिन्न शाखाओं में बांटा गया। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि राज्य पुलिस या ACB से जांच का अधिकार छीन लिया गया है।

अदालत ने पुराने फैसले A.C. Sharma बनाम Delhi Administration (1973) का भी जिक्र किया, जिसमें यह सिद्धांत रखा गया था कि DSPE Act “सक्षम बनाने वाला” कानून है-जो CBI को शक्ति देता है, लेकिन राज्य पुलिस की शक्ति खत्म नहीं करता।

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फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि-

“इस मामले में विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज की जाती है।”

इसके साथ ही, लंबित आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

Case Title: Nawal Kishore Meena @ N.K Meena vs State of Rajasthan

Case No.: SLP (Crl.) No. 492/2026

Decision Date: 19-01-2026

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