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लंबे अलगाव और मानसिक क्रूरता को मानते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने तलाक की मंजूरी दी

Shivam
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राजस्थान हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि संबंध पूरी तरह टूट चुके हैं और क्रूरता के आधार पर तलाक उचित है।

लंबे अलगाव और मानसिक क्रूरता को मानते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने तलाक की मंजूरी दी

राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने एक महत्वपूर्ण वैवाहिक विवाद में फैसला सुनाते हुए पत्नी की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया और विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि परिस्थितियाँ ऐसी हैं कि दोनों पक्षों को साथ रहने के लिए मजबूर करना स्वयं में “क्रूरता” होगा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला पति-पत्नी के बीच विवाह विच्छेद से जुड़ा था, जिसमें पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक की मांग की थी। दोनों का विवाह वर्ष 2010 में हुआ था और बाद में वे विदेश में रहने लगे।

पत्नी का आरोप था कि उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और पति का अन्य महिला के साथ संबंध था। वहीं, पति ने इन आरोपों से इनकार किया और बताया कि उसे अमेरिका की अदालत से 2015 में एकपक्षीय (ex parte) तलाक मिल चुका है।

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परिवार न्यायालय, बीकानेर ने पहले पत्नी की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद यह अपील उच्च न्यायालय में दायर की गई।

न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति सुनील बेनीवाल की पीठ ने रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों का विस्तृत विश्लेषण किया। कोर्ट ने माना कि पति द्वारा विदेश में एकतरफा तलाक लेना और वैवाहिक संबंधों को समाप्त करने का उसका स्पष्ट इरादा, पत्नी के प्रति मानसिक क्रूरता को दर्शाता है।

अदालत ने कहा,

“ऐसी स्थिति में पक्षकारों को साथ रहने के लिए बाध्य करना व्यावहारिक नहीं है और इससे दोनों पक्षों पर मानसिक दबाव पड़ेगा।”

कोर्ट ने यह भी पाया कि दोनों के बीच संबंध लंबे समय से टूट चुके हैं और सुलह की कोई वास्तविक संभावना नहीं बची है। कई बार मध्यस्थता के प्रयास भी असफल रहे।

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अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका की अदालत द्वारा दिया गया एकपक्षीय तलाक भारत में स्वतः मान्य नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसा आदेश तभी मान्य होगा जब भारतीय कानून के अनुरूप हो और दोनों पक्षों को उचित सुनवाई का अवसर मिला हो। इस मामले में ऐसा नहीं पाया गया।

सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, उच्च न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि विवाह पूरी तरह टूट चुका है और इसे जारी रखना दोनों पक्षों के लिए अनुचित होगा।

अदालत ने आदेश दिया कि:

• पत्नी की अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है

• परिवार न्यायालय का पूर्व आदेश आंशिक रूप से निरस्त किया जाता है

• हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत विवाह विच्छेद (तलाक) का डिक्री पारित की जाती है

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