Logo

राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म मामले में पिता की उम्रकैद बरकरार रखी, पीड़िता को ₹7 लाख मुआवजा देने का आदेश

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

बी पुत्र चतरा राम बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य। राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म मामले में पिता की उम्रकैद बरकरार रखी और पीड़िता को ₹7 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया।

राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म मामले में पिता की उम्रकैद बरकरार रखी, पीड़िता को ₹7 लाख मुआवजा देने का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने एक बेहद गंभीर मामले में नाबालिग बेटी से बार-बार दुष्कर्म करने के आरोपी पिता की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि यह अपराध केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि पिता-बेटी जैसे पवित्र रिश्ते के साथ घोर विश्वासघात है।

डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और उसके द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो भी आरोपों की पुष्टि करता है। अदालत ने राज्य सरकार को पीड़िता को 7 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश भी दिया।

Read also:-ओडिशा हाईकोर्ट ने पुलिस उत्पीड़न के आरोपों पर याचिका खारिज की, कहा-उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाएं

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, मार्च 2023 में पीड़िता के चचेरे भाई ने पुलिस थाना देसूरी, जिला पाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 14 वर्षीय लड़की घर से बिना बताए कहीं चली गई है।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

जांच के दौरान पुलिस को ऐसे तथ्य मिले जिनसे पता चला कि लड़की अपने ही पिता द्वारा लंबे समय से यौन शोषण का शिकार हो रही थी। बाद में पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3), 376(2)(F), 376(2)(J) और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया।

ट्रायल कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

अदालत के सामने क्या दलीलें दी गईं

आरोपी के वकील ने अदालत में कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत है और साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया।

Read also:-पुलिसकर्मी को कार से टक्कर मारकर बोनट पर घसीटने के आरोप में आरोपी को जमानत नहीं: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

उन्होंने तर्क दिया कि:

• पीड़िता के बयानों में विरोधाभास हैं।

• मेडिकल रिपोर्ट में आरोपी को नपुंसक बताया गया है।

• एक वीडियो के आधार पर दोषसिद्धि की गई, जबकि उसका फॉरेंसिक परीक्षण लंबित था।

वहीं सरकारी वकील ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता की गवाही स्पष्ट और भरोसेमंद है। उन्होंने अदालत को बताया कि पीड़िता ने स्वयं घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया था और उसे सबूत के रूप में पेश किया गया।

अदालत की प्रमुख टिप्पणियाँ

हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और उसके बयान में ऐसा कोई बड़ा विरोधाभास नहीं है जिससे आरोपों पर संदेह किया जा सके।

अदालत ने कहा:

“यदि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय और भरोसेमंद हो, तो केवल उसी आधार पर दोषसिद्धि की जा सकती है।”

बेंच ने यह भी कहा कि आरोपी द्वारा यह तर्क देना कि वह नपुंसक है, मामले में उसे राहत नहीं दे सकता, क्योंकि अदालत ने स्वयं वीडियो देखा और उसमें आरोपी द्वारा यौन हमला करते हुए देखा गया।

अदालत ने यह भी कहा कि किसी नाबालिग लड़की के लिए अपने ही पिता के खिलाफ ऐसा आरोप लगाना बेहद कठिन होता है।

“यह कल्पना करना भी कठिन है कि एक नाबालिग बेटी अपने ही पिता पर ऐसा गंभीर आरोप झूठा लगाएगी, जब तक कि घटना वास्तव में न हुई हो।”

रिश्ते के विश्वासघात पर सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि पिता का कर्तव्य अपनी बेटी की रक्षा करना होता है, लेकिन इस मामले में आरोपी ने उसी भरोसे को तोड़ा।

Read also:-कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम फैसला: पिता का नाम रहते हुए भी बच्चे के सरनेम में मां का नाम जोड़ने की अनुमति

अदालत ने कहा कि बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक चोट भी पहुंचाते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है।

अदालत का फैसला

सभी साक्ष्यों और गवाहियों का पुनः मूल्यांकन करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन ने आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित कर दिए हैं।

इसलिए अदालत ने:

• ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा

• आरोपी की आपराधिक अपील और सजा निलंबन की अर्जी खारिज कर दी

• राज्य सरकार को पीड़िता को 7 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया।

Case Title: B S/o Chatra Ram vs State of Rajasthan & Ors.

Case No.: D.B. Criminal Appeal No. 262/2023 & SOSA No. 2147/2025

Decision Date: 24 February 2026

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates