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RPwD अधिनियम 'पूर्ण सहायता' प्रदान करने की अनुमति देता है, अधिकारी नियमों के अभाव का हवाला नहीं दे सकते: दिल्ली उच्च न्यायालय

Shivam
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दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर मरीज के मामले में IHBAS रिपोर्ट की अनिवार्यता पर रोक लगाते हुए निजी डॉक्टर की रिपोर्ट को अस्थायी रूप से मान्य माना। - गुरप्रीत कौर मैनी बनाम जीएनसीटीडी और अन्य।

RPwD अधिनियम 'पूर्ण सहायता' प्रदान करने की अनुमति देता है, अधिकारी नियमों के अभाव का हवाला नहीं दे सकते: दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली हाईकोर्ट में एक संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एक बुजुर्ग मरीज की स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण राहत दी। अदालत ने कहा कि जब तक जिला न्यायालय अंतिम निर्णय नहीं लेता, तब तक IHBAS की मेडिकल रिपोर्ट अनिवार्य नहीं होगी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला गुरप्रीत कौर मैनी बनाम GNCTD से जुड़ा है। याचिकाकर्ता अपने 78 वर्षीय पति, जिवतेश सिंह मैनी की ओर से अदालत पहुंचीं। मरीज गंभीर बीमारियों एडवांस्ड वैस्कुलर डिमेंशिया, अल्जाइमर और बार-बार होने वाले दौरे से पीड़ित हैं और पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं।

पहले, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, साकेत ने दिव्यांगजनों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत याचिकाकर्ता को अभिभावक नियुक्त किया था और हर तीन महीने में मेडिकल रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था।

हालांकि, हाल के आदेश में यह कहा गया कि रिपोर्ट केवल मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान(IHBAS) से ही लाई जाए, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।

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सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने मामले के मानवीय पहलू पर जोर दिया।

अदालत ने कहा कि मरीज की हालत बेहद गंभीर है और उसे बार-बार अस्पताल ले जाना उसके स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि RPWD Act के तहत “टोटल सपोर्ट” देने का प्रावधान मौजूद है और केवल नियमों की अनुपस्थिति के आधार पर अधिकारों का उपयोग रोका नहीं जा सकता।

“कानून में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है कि आवश्यक परिस्थितियों में पूर्ण सहायता प्रदान न की जा सके,” अदालत ने कहा।

मुख्य सवाल यह था कि क्या अदालत मरीज की स्थिति को देखते हुए निजी डॉक्टर की रिपोर्ट को स्वीकार कर सकती है या IHBAS की रिपोर्ट अनिवार्य है।

सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि इस तरह के मामलों में नियम स्पष्ट नहीं हैं, जबकि याचिकाकर्ता ने इसे असंगत और असुरक्षित बताया।

अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता संबंधित जिला न्यायाधीश के समक्ष “टोटल सपोर्ट” की अनुमति के लिए आवेदन कर सकती हैं।

साथ ही, जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक IHBAS से रिपोर्ट लाने की अनिवार्यता समाप्त रहेगी और मरीज के निजी चिकित्सक की रिपोर्ट पर्याप्त मानी जाएगी।

इसी के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Case Details:

Case Title: Gurpreet Kaur Maini vs Govt. of NCT of Delhi & Ors.

Case Number: W.P.(C) 5294/2026

Judge: Justice Purushaindra Kumar Kaurav

Decision Date: April 20, 2026

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