Logo

RTE के तहत स्कूल चुनने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया, अपील खारिज।

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

दिल्ली हाईकोर्ट ने EWS प्रवेश मामले में अपील खारिज करते हुए कहा कि सत्र समाप्त होने के बाद, बिना अंतरिम आदेश के प्रवेश का अधिकार समाप्त हो जाता है। - Pooja vs Aadharshila Vidyapeeth & Anr.

RTE के तहत स्कूल चुनने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया, अपील खारिज।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि यदि किसी छात्र को अदालत से अंतरिम राहत (interim protection) नहीं मिलती और शैक्षणिक सत्र समाप्त हो जाता है, तो उस सत्र के लिए प्रवेश का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है। कोर्ट ने एक अभिभावक की अपील खारिज करते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार किसी विशेष स्कूल को चुनने का अधिकार नहीं देता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक बच्ची के EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटे में प्रवेश से जुड़ा था। अपीलकर्ता, जो बच्ची की अभिभावक हैं, ने वर्ष 2023-24 के लिए कक्षा 1 में प्रवेश के लिए आवेदन किया था।

डायरेक्टरेट ऑफ एजुकेशन (DoE) द्वारा आयोजित ड्रॉ ऑफ लॉट्स में बच्ची का चयन एक निजी स्कूल में हो गया। लेकिन स्कूल ने यह कहकर प्रवेश नहीं दिया कि पहले सामान्य वर्ग की सीटें भरनी होंगी।

इसके बाद अभिभावक ने कई बार स्कूल और DoE से संपर्क किया, लेकिन प्रवेश नहीं मिला। अंततः उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

Read also:- NSA निरोध पर बड़ा सवाल: क्या डीएम के पास सुनवाई का अधिकार? मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामला बड़ी पीठ को सौंपा

सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि DoE ने बाद में स्कूल की EWS सीटों की संख्या कम कर दी थी। इस पर कोर्ट ने पहले ही टिप्पणी की थी कि ऐसी प्रक्रिया “अराजक स्थिति” पैदा कर सकती है।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि,

“एक बार ड्रॉ ऑफ लॉट्स के बाद सीटों में बदलाव करना पूरी प्रक्रिया को अव्यवस्थित कर सकता है।”

मुख्य सवाल यह था कि क्या छात्रा को अगले शैक्षणिक सत्र (2024-25) में उसी स्कूल में प्रवेश दिया जा सकता है, जबकि पिछला सत्र खत्म हो चुका था।

अपीलकर्ता का तर्क था कि उन्होंने समय रहते कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, इसलिए राहत मिलनी चाहिए।

Read also:- गैर-आरोपी की निजता का उल्लंघन नहीं किया जा सकता: दिल्ली उच्च न्यायालय ने पत्नी को निशाना बनाने वाली जमानत शर्तों को रद्द किया

वहीं DoE ने बताया कि बच्ची को पहले ही एक अन्य पसंदीदा स्कूल में सीट दी गई थी, लेकिन अभिभावक ने उसे स्वीकार नहीं किया।

डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि:

“शिक्षा का अधिकार यह नहीं देता कि छात्र किसी विशेष स्कूल को चुन सके।”

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि यदि किसी मामले में न तो अंतरिम प्रवेश दिया गया हो और न ही सीट सुरक्षित रखी गई हो, तो शैक्षणिक वर्ष समाप्त होने के बाद प्रवेश का अधिकार समाप्त हो जाता है।

“सत्र समाप्त होने के बाद, बिना किसी अंतरिम आदेश के, प्रवेश का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है।”

Read also:- दस्तावेज मौजूद होने पर चिकित्सा आयु परीक्षण की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नाबालिग को जमानत दी

कोर्ट ने पाया कि:

• बच्ची को एक वैकल्पिक स्कूल में पहले ही सीट दी गई थी

• अभिभावक ने उस सीट को स्वीकार नहीं किया

• मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं मिली थी

• शैक्षणिक सत्र समाप्त हो चुका था

इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि न तो सीट बढ़ाई जा सकती है और न ही अगले सत्र में उसी स्कूल में प्रवेश दिया जा सकता है।

अंततः कोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया और कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है।

Case Title:- Pooja (Guardian of Baby Devanshi Jaisawar) vs Aadharshila Vidyapeeth & Anr.

Case Number: LPA 810/2024

Judge: Chief Justice Devendra Kumar Upadhyaya & Justice Tejas Karia

Decision Date: 25 March 2026

Download Order

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates