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ग्रेच्युटी रोक सकते हैं नियोक्ता, लेकिन संतुलन जरूरी: सुप्रीम कोर्ट ने तय किया ₹1000 मासिक पेनल रेंट

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्वार्टर खाली न करने पर ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है, लेकिन संतुलन रखते हुए ₹1000 मासिक पेनल रेंट तय किया। - स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया का प्रबंधन और अन्य बनाम शंभू प्रसाद सिंह और अन्य।

ग्रेच्युटी रोक सकते हैं नियोक्ता, लेकिन संतुलन जरूरी: सुप्रीम कोर्ट ने तय किया ₹1000 मासिक पेनल रेंट

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि यदि कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद कंपनी का क्वार्टर खाली नहीं करते, तो नियोक्ता ग्रेच्युटी (सेवानिवृत्ति लाभ) रोक सकता है। हालांकि, कोर्ट ने संतुलन बनाते हुए पेनल रेंट (जुर्माना किराया) को सीमित करने का रास्ता भी दिखाया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) और उसके रिटायर्ड कर्मचारियों के बीच विवाद से जुड़ा था।

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कर्मचारी रिटायर होने के बाद भी कंपनी द्वारा दिए गए स्टाफ क्वार्टर में रह रहे थे और ग्रेच्युटी की मांग कर रहे थे। दूसरी तरफ, SAIL का कहना था कि जब तक कर्मचारी क्वार्टर खाली नहीं करते, तब तक ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है।

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कई याचिकाएं और अपीलें अलग-अलग समय पर दायर हुईं, जिनमें हाईकोर्ट के फैसलों को चुनौती दी गई थी।

सुनवाई के दौरान जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस पंकज मिथल की बेंच ने स्पष्ट किया कि:

“ग्रेच्युटी का भुगतान और क्वार्टर खाली करना दोनों एक-दूसरे से जुड़े दायित्व हैं, इन्हें अलग-अलग लागू नहीं किया जा सकता।”

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कोर्ट ने कहा कि:

• SAIL के नियमों के अनुसार, कंपनी को अधिकार है कि वह ग्रेच्युटी रोक सके यदि कर्मचारी कंपनी का आवास खाली नहीं करते।

• पेनल रेंट वसूलना स्वाभाविक परिणाम है यदि कर्मचारी तय समय के बाद भी क्वार्टर में रहते हैं।

• पहले दिए गए आदेश (राम नरेश सिंह केस, 2017) को binding precedent नहीं माना जा सकता क्योंकि वह विशेष परिस्थितियों में दिया गया था।

“अगर कर्मचारी तय समय से अधिक अवधि तक क्वार्टर में रहता है, तो पेनल रेंट वसूलना स्वाभाविक है और इसे ग्रेच्युटी से समायोजित किया जा सकता है।”

अदालत के सामने मुख्य प्रश्न थे:

1. क्या कंपनी ग्रेच्युटी से पेनल रेंट काट सकती है?

2. क्या पुराने आदेश (2017) को बाध्यकारी माना जा सकता है?

कोर्ट ने दोनों सवालों का जवाब SAIL के पक्ष में दिया।

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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि:

• SAIL को ग्रेच्युटी रोकने और उसमें से पेनल रेंट समायोजित करने का अधिकार है।

• ग्रेच्युटी पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा जब तक कर्मचारी अनधिकृत रूप से क्वार्टर में रह रहे हों।

• संतुलन बनाते हुए कोर्ट ने पेनल रेंट ₹1000 प्रति माह तय किया (सिर्फ इस केस के लिए)।

“यह राशि न्यायसंगत संतुलन के लिए तय की गई है और इसे भविष्य के मामलों में मिसाल नहीं माना जाएगा।”

कोर्ट ने आगे निर्देश दिया:

• कंपनी 4 हफ्तों में देय राशि की गणना करे

• कर्मचारियों को 4 हफ्तों में क्वार्टर खाली करना होगा

• दोनों पक्षों के दायित्व एक साथ पूरे होंगे

अंत में, सभी सिविल अपीलें स्वीकार कर ली गईं और कोई लागत नहीं लगाई गई।

Case Title: The Management of Steel Authority of India & Ors. v. Shambhu Prasad Singh & Ors.

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