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साकेत कोर्ट कर्मचारी की आत्महत्या पर दिल्ली हाईकोर्ट गंभीर, स्टाफ की कमी और कार्यभार के ऑडिट का आदेश

Shivam
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आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट बनाम उच्च न्यायालय और अन्य - साकेत अदालत के अहमद की आत्महत्या के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने अदालत के कर्मचारियों के रिक्त पदों और कार्यभार का ऑडिट करने का आदेश दिया, चल रही कानूनी कार्यवाही का हवाला देते हुए एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया।

साकेत कोर्ट कर्मचारी की आत्महत्या पर दिल्ली हाईकोर्ट गंभीर, स्टाफ की कमी और कार्यभार के ऑडिट का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वह जिला अदालतों में कार्यरत कर्मचारियों की कार्य स्थितियों को लेकर पूरी तरह सजग है। साकेत जिला अदालत में एक कोर्ट कर्मचारी की आत्महत्या के बाद कोर्ट ने स्टाफ की रिक्तियों और कार्यभार के आकलन के लिए ऑडिट कराने का निर्देश दिया। हालांकि, इस मामले में अलग से एफआईआर दर्ज करने की मांग को कोर्ट ने फिलहाल खारिज कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 9 जनवरी को साकेत कोर्ट परिसर में हुई एक दुखद घटना से जुड़ा है। 35 वर्षीय कोर्ट कर्मचारी, जो अहलमद (अदालती रिकॉर्ड संभालने वाला कर्मचारी) के पद पर कार्यरत था, ने कथित तौर पर काम के अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली।

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घटना के बाद आनंद लीगल एड फोरम की ओर से जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में एफआईआर दर्ज करने, न्यायिक जांच कराने और दिल्ली की जिला अदालतों में कर्मचारियों की रिक्तियां भरने की मांग की गई थी।

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अदालत की टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने घटना को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कहा कि हाईकोर्ट प्रशासन इस स्थिति को लेकर गंभीर है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा,

“हम पूरी तरह सजग हैं। कोर्ट स्टाफ की रिक्तियों और कार्यभार को लेकर ऑडिट का आदेश दिया गया है।”

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पीठ ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लगाए गए आरोपों पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि मृतक को नवंबर में ही पदोन्नति के बाद अहलमद के रूप में तैनात किया गया था और वह एक पूरी तरह डिजिटाइज्ड कोर्ट में कार्यरत था।

पीठ ने टिप्पणी की,

“यह कहना कि वह 3,000 फाइलें संभाल रहा था, जनभावना को आकर्षित करता है, लेकिन यह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।”

एफआईआर की मांग पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस पहले ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मृत्यु की कार्यवाही शुरू कर चुकी है।

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“पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है और आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर होगी,” पीठ ने कहा।

निर्णय

हाईकोर्ट ने यह दर्ज करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया कि प्रशासनिक स्तर पर रिक्तियां भरने, स्टाफ संरचना को तर्कसंगत बनाने और कार्यभार के संतुलित वितरण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतक कर्मचारी के परिवार को कानून के तहत मिलने वाली राहत दी जा रही है।

“इन टिप्पणियों के साथ याचिका का निस्तारण किया जाता है,” आदेश में कहा गया।

Case Title:- Anand Legal Aid Forum Trust v. High Court & Ors

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