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सुप्रीम कोर्ट ने एग्जीक्यूटिंग कोर्ट को डिक्री बदलने का अधिकार नहीं, सभी संशोधन रद्द

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट डिक्री में बदलाव नहीं कर सकता और उसे उसी रूप में लागू करना होगा जैसा मूल आदेश में तय किया गया था। - मौरिस डब्ल्यू. इनिस बनाम लिली कज़रूनी लिली आरिफ शेख

सुप्रीम कोर्ट ने एग्जीक्यूटिंग कोर्ट को डिक्री बदलने का अधिकार नहीं, सभी संशोधन रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया है कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट (Execution Court) को किसी भी डिक्री (आदेश) में बदलाव करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि डिक्री को उसी रूप में लागू करना होगा, जैसा वह पारित की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला महाराष्ट्र के पंचगनी स्थित जमीन विवाद से जुड़ा है। अपीलकर्ता ने पहले जमीन खरीदी और उसका एक हिस्सा प्रतिवादी को बेचा। बाद में दोनों पक्षों के बीच 2009 में एक एग्रीमेंट हुआ, जिसके आधार पर 2012 में ‘स्पेसिफिक परफॉर्मेंस’ (समझौते को लागू कराने) के लिए मुकदमा दायर किया गया।

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साल 2017 में दोनों पक्षों ने आपसी समझौता कर लिया, जिसके अनुसार जमीन का बंटवारा तय हुआ-कुछ हिस्सा साझा (common) रखा गया और बाकी बराबर-बराबर बांटा गया। इसी आधार पर 14 जुलाई 2017 को डिक्री पारित हुई

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डिक्री को लागू करने के दौरान, एग्जीक्यूटिंग कोर्ट ने 2021 में आदेश पारित करते हुए जमीन के हिस्सों में बदलाव कर दिया। कोर्ट ने यह कहते हुए हिस्सों में फेरबदल किया कि कुछ निर्माण नक्शे के अनुसार नहीं थे और व्यावहारिक दिक्कतें आ सकती हैं।

बाद में समीक्षा (review) में भी इन बदलावों को और संशोधित किया गया। हाई कोर्ट ने इन आदेशों को सही ठहराया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट कहा कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट की भूमिका सीमित होती है।

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कोर्ट ने कहा,

“एग्जीक्यूटिंग कोर्ट डिक्री के पीछे नहीं जा सकता और न ही उसके नियमों में बदलाव कर सकता है।”

अदालत ने यह भी दोहराया कि:

• एग्जीक्यूटिंग कोर्ट केवल डिक्री को लागू कर सकता है

• वह अपने विवेक से उसमें बदलाव या संशोधन नहीं कर सकता

• केवल तब हस्तक्षेप संभव है जब डिक्री पूरी तरह अवैध (nullity) हो

कोर्ट ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि डिक्री चाहे गलत ही क्यों न हो, जब तक उसे उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त नहीं किया जाता, वह बाध्यकारी रहती है।

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सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर डिक्री में बदलाव किया, जो कानून के खिलाफ है।

अदालत ने 19 जुलाई 2021, 26 अगस्त 2021 और 11 अक्टूबर 2021 के सभी आदेशों को रद्द कर दिया।

अंत में कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

“डिक्री को उसी रूप और शर्तों में लागू किया जाए, जैसा कि वह मूल रूप से पारित की गई थी।”

अपील स्वीकार कर ली गई और लंबित आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

Case Details

Case Title: Maurice W. Innis vs Lily Kazrooni @ Lily Arif Shaikh

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 8166 of 2022

Judges: Justice Pankaj Mithal and Justice Prasanna B. Varale

Decision Date: April 9, 2026

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