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‘कहानी-2’ पर कॉपीराइट केस खत्म: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- “शिकायत निराधार और परेशान करने वाली”

Shivam
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‘कहानी-2’ पर कॉपीराइट केस खत्म: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- “शिकायत निराधार और परेशान करने वाली”

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च 2026 को एक अहम फैसले में फिल्म निर्देशक सुजॉय घोष के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि कहानी-2 फिल्म पर कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप ठोस आधार के बिना लगाए गए थे।

अदालत ने यह भी दोहराया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को आपराधिक मुकदमे में घसीटना उचित नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला एक शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया था कि फिल्म कहानी-2: दुर्गा रानी सिंह की कहानी, शिकायतकर्ता की स्क्रिप्ट ‘सबक’ से कॉपी की गई है।

शिकायतकर्ता का दावा था कि उसने 2015 में अपनी स्क्रिप्ट निर्देशक के साथ साझा की थी और बाद में फिल्म में उसी की कहानी इस्तेमाल कर ली गई।

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हालांकि, इस विवाद की पहले ही स्क्रीन राइटर्स एसोसिएशन (SWA) द्वारा जांच की जा चुकी थी। विशेषज्ञ समिति ने 2018 में साफ कहा था कि दोनों स्क्रिप्ट्स में कोई समानता नहीं है।

इसके बावजूद, हजारीबाग के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने समन जारी कर दिया, जिसे झारखंड हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे ने निचली अदालतों के आदेशों को गलत ठहराया।

कोर्ट ने पाया कि शिकायत में कोई ठोस विवरण नहीं दिया गया कि आखिर किस हिस्से की नकल की गई है।

“शिकायत में केवल सामान्य और बिना आधार के आरोप हैं, जिनसे पहली नजर में भी समानता साबित नहीं होती,” अदालत ने कहा।

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कोर्ट ने यह भी नोट किया कि गवाहों के बयान में भी यह नहीं बताया गया कि कौन-सा हिस्सा कॉपी किया गया था।

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता ने SWA की उस रिपोर्ट को छिपाया, जिसमें पहले ही कहा जा चुका था कि दोनों रचनाओं में कोई समानता नहीं है।

“समन आदेश यांत्रिक तरीके से पारित किया गया है और इसमें न्यायिक सोच का अभाव है,” कोर्ट ने टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने समय-सीमा (timeline) का भी विश्लेषण किया और पाया कि निर्देशक की स्क्रिप्ट पहले ही तैयार और रजिस्टर हो चुकी थी।

फिल्म कहानी-2 का कॉन्सेप्ट और स्क्रिप्ट 2012–2013 में रजिस्टर हो चुके थे, जबकि शिकायतकर्ता की स्क्रिप्ट 2015 में अस्तित्व में आई।

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“जब शिकायतकर्ता की स्क्रिप्ट बाद में बनी, तो कॉपीराइट उल्लंघन का सवाल ही नहीं उठता,” कोर्ट ने स्पष्ट किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला “स्पष्ट रूप से निराधार और परेशान करने वाला” है।

अदालत ने:

• 7 जून 2018 का CJM का समन आदेश रद्द किया

• 22 अप्रैल 2025 का झारखंड हाईकोर्ट का आदेश भी निरस्त किया

• पूरे आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही खत्म कर दी

अंततः, अपील को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सभी कार्यवाही समाप्त कर दी।

Case Title: Sujoy Ghosh v. State of Jharkhand & Anr.

Case Number: Special Leave to Appeal (Crl.) No(s). 9452/2025

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