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SC ने SLP खारिज होने के बाद पुनर्विचार से किया इनकार, OTS और IBC घटनाक्रम को अलग मंच पर चुनौती देने की छूट

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SLP खारिज होने के बाद MA के जरिए मामला दोबारा नहीं खोला जा सकता, भले ही बाद में OTS या IBC घटनाएं सामने आएं। - लांबा एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम धीर ग्लोबल इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और अन्य।

SC ने SLP खारिज होने के बाद पुनर्विचार से किया इनकार, OTS और IBC घटनाक्रम को अलग मंच पर चुनौती देने की छूट

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट किया कि एक बार विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज हो जाने के बाद, उसे बाद की घटनाओं के आधार पर पुनः नहीं खोला जा सकता।

न्यायालय ने M/s लांबा एक्सपोर्ट्स प्रा. लिमिटेड द्वारा निर्मित विविध अनुप्रयोग (MA) को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व आदेश को वापस लेने की मांग की गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद एक Agreement to Sell (13 अगस्त 2021) से जुड़ा है, जिसमें गुरुग्राम स्थित एक संपत्ति के बिक्री समझौते को लेकर पक्षों के बीच मतभेद उत्पन्न हुआ।

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसने करोड़ों रुपये अग्रिम भुगतान किए और समझौते को लागू कराने के लिए सिविल मुकदमा दायर किया।

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हालांकि, प्रतिवादियों ने कहा कि यह समझौता बैंक द्वारा प्रस्तावित One Time Settlement (OTS) की स्वीकृति पर निर्भर था, जो अंततः नहीं मिली।

ट्रायल कोर्ट ने प्रारंभ में याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतरिम राहत दी थी, लेकिन अपीलीय अदालत और बाद में हाई कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया।

SLP दायर होने पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभ में याचिकाकर्ता को ₹26 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया।

इसके बाद, 25 फरवरी 2025 को SLP खारिज कर दी गई।

याचिकाकर्ता ने इसके बाद MA दायर कर कहा कि:

• OTS बाद में स्वीकार हो गया

• CIRP (Insolvency प्रक्रिया) वापस ले ली गई

• महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया गया

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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट कहा:

“एक बार SLP खारिज हो जाने के बाद, कोर्ट सामान्यतः उस मामले में पुनः हस्तक्षेप नहीं करता।”

पीठ ने यह भी कहा कि:

“बाद की घटनाएं, विशेषकर जो अलग वैधानिक प्रक्रिया (IBC) में हुई हों, उन्हें इस MA के माध्यम से नहीं परखा जा सकता।”

न्यायालय ने यह भी दोहराया कि:

“फ्रॉड (धोखाधड़ी) का आरोप गंभीर होता है, लेकिन केवल आरोप लगाने से आदेश को रद्द नहीं किया जा सकता।”

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कोर्ट ने कहा कि:

• MA तभी स्वीकार हो सकती है जब आदेश के पालन में असंभवता या स्पष्ट त्रुटि हो

• यहां ऐसा कोई आधार नहीं था

• IBC के तहत लिए गए निर्णय Committee of Creditors (CoC) की व्यावसायिक समझ (commercial wisdom) पर आधारित होते हैं, जिनमें कोर्ट सीमित हस्तक्षेप करता है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

• MA maintainable नहीं है

• SLP को दोबारा खोलने का कोई आधार नहीं है

• IBC से जुड़े विवादों के लिए अलग मंच उपलब्ध है

अंततः, Miscellaneous Application No. 1256 of 2025 खारिज कर दी गई और साथ ही संबंधित अंतरिम आवेदन भी निरर्थक हो गया।

Case Title: M/s Lamba Exports Pvt. Ltd. vs M/s Dhir Global Industries Pvt. Ltd. & Ors.

Case Number: Miscellaneous Application No. 1256 of 2025 (in Special Leave Petition (Civil) No. 12264 of 2024)

Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: March 23, 2026

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