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महिला सेना अधिकारियों के साथ ‘संरचनात्मक भेदभाव’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, AFT के फैसले पर उठाए सवाल

Shivam
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महिला सेना अधिकारियों के साथ ‘संरचनात्मक भेदभाव’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, AFT के फैसले पर उठाए सवाल

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission - PC) देने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि चयन प्रक्रिया में ऐसे ढांचागत (structural) असमानताएं दिखती हैं, जिन्होंने महिलाओं की मेरिट को प्रभावित किया।

यह मामला लेफ्टिनेंट कर्नल पूजा पाल और अन्य अधिकारियों द्वारा दायर अपीलों से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

करीब 73 महिला SSC अधिकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें PC देने की प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं थी। Armed Forces Tribunal (AFT) ने पहले उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं, यह कहते हुए कि चयन केवल मेरिट के आधार पर हुआ है और कोई भेदभाव नहीं हुआ।

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महिला अधिकारियों का कहना था कि उनके सेवा रिकॉर्ड (ACR) ऐसे समय में बनाए गए जब उन्हें PC के लिए पात्र ही नहीं माना जाता था, जिससे उनकी रेटिंग प्रभावित हुई।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

1. ACR (सेवा रिकॉर्ड) पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि महिला अधिकारियों के ACR उस दौर में लिखे गए जब उन्हें स्थायी कमीशन का कोई अवसर नहीं था।

“कोर्ट ने कहा कि जब किसी अधिकारी के भविष्य की संभावना ही सीमित मानी जाए, तो उसकी मूल्यांकन प्रक्रिया भी उसी मानसिकता से प्रभावित होती है।”

अदालत ने माना कि इस वजह से महिलाओं को लगातार औसत ग्रेड दिए गए, जबकि पुरुष अधिकारियों को बेहतर ग्रेड मिलते रहे।

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2. समान अवसर की कमी

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि महिला अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां (criteria appointments) और करियर बढ़ाने वाले कोर्स नहीं दिए गए।

“यह एक ऐसी दौड़ की तरह है, जहां सभी को एक साथ दौड़ाया गया, लेकिन कुछ को पहले से बेहतर प्रशिक्षण दिया गया।”

इससे चयन प्रक्रिया में उनका समग्र प्रदर्शन प्रभावित हुआ।

3. चयन प्रक्रिया में ‘छुपा हुआ भेदभाव’

अदालत ने कहा कि भले ही अंतिम चयन प्रक्रिया (Selection Board) में पहचान छुपाई गई हो, लेकिन मूल समस्या पहले से मौजूद थी।

“प्रक्रिया के अंतिम चरण में सुधार, पहले से मौजूद असमानताओं को खत्म नहीं कर सकता।”

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4. कम अंतर से छूटी मेरिट

कोर्ट ने पाया कि कई महिला अधिकारी सिर्फ 0.5 या 1 अंक से चयन से बाहर हो गईं। ऐसे में मामूली असमानता भी निर्णायक बन गई।

वैकेंसी कैप पर रुख (Vacancy Cap Issue)

सुप्रीम कोर्ट ने 250 पदों की सीमा (vacancy cap) को नीति का मामला बताते हुए उसमें हस्तक्षेप से फिलहाल परहेज किया।

हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि चयन प्रक्रिया ही असमान है, तो यह सीमा सुधारात्मक राहत (corrective relief) देने में बाधा नहीं बन सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि महिला SSC अधिकारियों को ACR ग्रेडिंग और करियर अवसरों में संरचनात्मक नुकसान हुआ, जिससे उनकी मेरिट प्रभावित हुई।

अदालत ने Armed Forces Tribunal के उस निष्कर्ष को गलत ठहराया जिसमें कहा गया था कि प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष थी।

Case Details

• Case Title: Lt. Col. Pooja Pal & Ors. vs Union of India & Ors.

• Case Number: Civil Appeal Nos. 9747–9757/2024 & connected matters

• Judge: CJI Surya Kant, Justice Ujjal Bhuyan, Justice N. Kotiswar Singh

• Decision Date: 24 March 2026

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