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SET उसी विषय में जरूरी: सुप्रीम कोर्ट ने केरल में HSST इकोनॉमिक्स नियुक्ति पर बड़ा फैसला सुनाया

Vivek G.
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जुबैर पी. बनाम केरल राज्य और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने कहा HSST नियुक्ति के लिए SET उसी विषय में जरूरी है। केरल शिक्षा नियमों पर बड़ा फैसला, अपील खारिज।

SET उसी विषय में जरूरी: सुप्रीम कोर्ट ने केरल में HSST इकोनॉमिक्स नियुक्ति पर बड़ा फैसला सुनाया

नई दिल्ली में आज एक अहम फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि हायर सेकेंडरी स्कूल टीचर (HSST) बनने के लिए स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (SET) उसी विषय में पास करना अनिवार्य है, जिसमें नियुक्ति होनी है।

मामला केरल के एक स्कूल में इकोनॉमिक्स के HSST पद पर नियुक्ति से जुड़ा था। अपीलकर्ता शिक्षक ने मलयालम में SET पास किया था, जबकि नियुक्ति इकोनॉमिक्स विषय में हुई थी। कोर्ट ने कहा-यह पर्याप्त नहीं है।

केस की पृष्ठभूमि

अपीलकर्ता ने 2002 में अपर प्राइमरी स्कूल टीचर के रूप में सेवा शुरू की। बाद में वे हाई स्कूल टीचर बने और 15 जुलाई 2021 को इकोनॉमिक्स विषय में HSST के रूप में नियुक्त हुए। उनके पास इकोनॉमिक्स में बीए, एमए और बीएड की डिग्री थी, लेकिन SET उन्होंने मलयालम में पास किया था।

दूसरी ओर, प्रतिस्पर्धी उम्मीदवार (प्रतिकारक संख्या 4) के पास भी इकोनॉमिक्स में बीए, एमए और बीएड था-साथ ही उन्होंने SET भी इकोनॉमिक्स विषय में ही पास किया था।

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यहीं से विवाद शुरू हुआ।

राज्य सरकार ने नियुक्ति को यह कहते हुए मंजूरी देने से इनकार कर दिया कि SET संबंधित विषय में होना चाहिए। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच और फिर डिवीजन बेंच-दोनों ने राज्य के फैसले को सही माना। मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

मुख्य कानूनी सवाल

सुप्रीम कोर्ट के सामने असली सवाल यह था:

क्या केरल एजुकेशन रूल्स के तहत HSST नियुक्ति के लिए SET “संबंधित विषय” में होना अनिवार्य है, या किसी भी विषय में SET पास होना पर्याप्त है?

अपीलकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि नियम 6.2(24)(iii) में “concerned subject” शब्द नहीं लिखा है, इसलिए किसी भी विषय में SET मान्य होना चाहिए।

राज्य और प्रतिस्पर्धी उम्मीदवार की ओर से कहा गया कि SET की पूरी संरचना ही विषय-विशिष्ट (subject-specific) है, इसलिए इसे संबंधित विषय में ही पास करना होगा।

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने नियमों और SET परीक्षा के प्रॉस्पेक्टस का विस्तार से अध्ययन किया।

पीठ ने कहा कि कानून की व्याख्या केवल शब्दों को अलग करके नहीं की जा सकती। “किसी प्रावधान को उसके संदर्भ, उद्देश्य और पूरी योजना के साथ पढ़ना जरूरी है,” बेंच ने टिप्पणी की।

कोर्ट ने SET परीक्षा की संरचना पर भी जोर दिया। प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, पेपर-II अभ्यर्थी के पोस्ट ग्रेजुएशन विषय पर आधारित होता है। यानी SET खुद विषय-विशिष्ट है।

पीठ ने स्पष्ट कहा, “यदि कोई उम्मीदवार एक विषय में पात्रता परीक्षा पास करे और दूसरे विषय में पढ़ाने का दावा करे, तो यह उच्च माध्यमिक स्तर की शैक्षणिक गुणवत्ता के उद्देश्य को विफल कर देगा।”

दस साल की सेवा से छूट का तर्क भी खारिज

अपीलकर्ता ने यह भी दलील दी कि नियम 10(4) के तहत दस वर्ष की हाई स्कूल सेवा होने पर SET से छूट मिल सकती है।

लेकिन रिकॉर्ड से स्पष्ट हुआ कि उनके पास केवल 9 वर्ष 10 माह 14 दिन की मान्य सेवा थी-जो आवश्यक 10 वर्ष से कम है।

कोर्ट ने कहा कि “न्यूनतम अवधि पूरी न होने पर छूट का दावा नहीं किया जा सकता।”

हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाई कोर्ट ने नियमों की सही व्याख्या की है।

पीठ ने निष्कर्ष दिया कि:

• SET उसी विषय में पास होना चाहिए जिसमें HSST नियुक्ति हो।

• अपीलकर्ता इकोनॉमिक्स में SET पास नहीं थे, इसलिए वे पात्र नहीं थे।

• प्रतिस्पर्धी उम्मीदवार, जिन्होंने इकोनॉमिक्स में SET पास किया था, नियमों के अनुरूप पात्र हैं।

कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि प्रतिस्पर्धी उम्मीदवार के दावे पर दो महीने के भीतर आवश्यक आदेश पारित किए जाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता से यदि कोई अतिरिक्त वेतन दिया गया हो, तो उसकी वसूली नहीं की जाएगी।

अंत में, दोनों सिविल अपीलें खारिज कर दी गईं।

Case Title: Zubair P. v. State of Kerala & Ors.

Case No.: Civil Appeal No. of 2026 (@ SLP No. 17785 of 2024 & 30768 of 2025)

Decision Date: 13 February 2026

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