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सोशल मीडिया पोस्ट हटाने से इनकार: मद्रास हाईकोर्ट ने शेफ रंगराज की अंतरिम याचिका खारिज की

Shivam
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मद्रास उच्च न्यायालय ने रंगराज बनाम जॉय क्रिज़िल्डा विवाद में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विवादित तथ्यों और मानहानि निषेधाज्ञा की सीमाओं का हवाला देते हुए अंतरिम प्रतिबंध आदेश देने से इनकार कर दिया। - टी. रंगराज बनाम जॉय क्रिज़िल्डा और अन्य।

सोशल मीडिया पोस्ट हटाने से इनकार: मद्रास हाईकोर्ट ने शेफ रंगराज की अंतरिम याचिका खारिज की

मद्रास हाईकोर्ट ने चर्चित शेफ और उद्यमी टी. रंगराज द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ डाले गए कथित आपत्तिजनक पोस्ट हटाने और आगे किसी भी तरह की सामग्री प्रकाशित करने पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने साफ कहा कि यह मामला “एकतरफा चुप्पी” लगाने का नहीं है, बल्कि तथ्यों की गहराई से जांच का विषय है।

यह आदेश मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार ने पारित किया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता T. Rangaraj ने कोर्ट को बताया कि वह ‘मधम्पट्टी पकशाला’ ब्रांड से जुड़े एक प्रसिद्ध शेफ हैं और टेलीविजन व फिल्मों में भी काम कर चुके हैं। उनका कहना था कि प्रतिवादी Joy Crizildaa ने इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो, फोटो और बयान डाले, जिनसे उनकी सामाजिक छवि और व्यवसाय को नुकसान पहुंचा।

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रंगराज ने आरोप लगाया कि इन पोस्ट्स से यह झूठा संदेश फैलाया गया कि उनके और जॉय क्रिज़िल्डा के बीच वैवाहिक संबंध है। उन्होंने इसे अपनी “पर्सनैलिटी राइट्स” और प्रतिष्ठा पर हमला बताया।

वहीं, जॉय क्रिज़िल्डा ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके और रंगराज के बीच केवल दोस्ती नहीं, बल्कि एक गंभीर निजी संबंध था। उन्होंने दावा किया कि दोनों ने मंदिर में विवाह किया था और इस रिश्ते से जुड़े कई निजी दस्तावेज, तस्वीरें और संवाद उनके पास मौजूद हैं।

उनका यह भी कहना था कि उन्होंने सोशल मीडिया पर जो कुछ साझा किया, वह अपने पक्ष को सामने रखने के लिए किया, न कि किसी को बदनाम करने के इरादे से।

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अदालत की टिप्पणियां

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेजों को देखने के बाद कहा कि यह मामला केवल “मानहानि” तक सीमित नहीं है।

न्यायालय ने टिप्पणी की,

“याचिकाकर्ता स्वयं यह स्वीकार करता है कि दोनों के बीच निजी संबंध थे। ऐसे में अंतरिम स्तर पर यह कहना कि प्रकाशित सामग्री पूरी तरह झूठी या दुर्भावनापूर्ण है, जल्दबाजी होगी।”

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कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि मानहानि के मामलों में ट्रायल से पहले सोशल मीडिया या मीडिया पर पूरी तरह रोक लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है। जब तक यह स्पष्ट न हो जाए कि सामग्री पूरी तरह असत्य है, तब तक पूर्व-प्रतिबंध (prior restraint) उचित नहीं माना जा सकता।

फैसला

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने रंगराज की अंतरिम याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने या आगे किसी भी सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि विवाद से जुड़े तथ्यों की जांच मुकदमे के दौरान ही की जा सकती है।

मामला अब नियमित सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगा।

Case Title: T. Rangaraj v. Joy Crizildaa & Ors.

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