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अवैध निर्माण पर सख्त रुख: झारखंड हाईकोर्ट ने JNAC क्षेत्र में तोड़फोड़ पर रोक से किया इनकार

Vivek G.
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राकेश कुमार झा बनाम झारखंड राज्य और अन्य। झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर में अवैध निर्माणों पर सख्त रुख अपनाते हुए तोड़फोड़ पर रोक से इनकार किया, JNAC की कार्रवाई को सही ठहराया।

अवैध निर्माण पर सख्त रुख: झारखंड हाईकोर्ट ने JNAC क्षेत्र में तोड़फोड़ पर रोक से किया इनकार

झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर में अवैध निर्माणों को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। अदालत ने कहा कि बिना अनुमति और नियमों के खिलाफ बने भवनों को बचाने के लिए अब कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला W.P. (PIL) No. 2078 of 2018 से जुड़ा है, जिसमें जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) के अंतर्गत हो रहे बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों को चुनौती दी गई थी।

कोर्ट के समक्ष पहले ही एक समिति की रिपोर्ट आ चुकी थी, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि कई भवन बिना स्वीकृति या तय मानकों से कहीं अधिक विचलन के साथ बनाए गए हैं।

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14 जनवरी 2026 को अदालत ने JNAC के वकील के बयान को रिकॉर्ड करते हुए कहा था कि अवैध निर्माणों को एक महीने के भीतर गिराया जाएगा। इसके बाद कई भवन मालिकों ने इस आदेश में संशोधन के लिए अंतरिम अर्ज़ियां दाखिल कीं।

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याचिकाकर्ताओं की दलीलें

अर्जी दाखिल करने वालों का कहना था कि-

• उन्हें अपनी इमारतों को नियमित (Regularize) कराने का मौका नहीं मिला

• सुप्रीम कोर्ट के “डिमोलिशन गाइडलाइंस” का उल्लंघन हुआ है

• JNAC की वैधानिक हैसियत पर भी सवाल उठाए गए

• बिना नोटिस दिए तोड़फोड़ करना कानून के खिलाफ है

उनका तर्क था कि यदि प्रक्रिया का पालन किया जाता, तो वे अपील कर सकते थे।

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कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए साफ कहा-

“सिर्फ दलीलें देने से कोई निर्माण वैध नहीं हो जाता। एक भी याचिकाकर्ता यह नहीं दिखा सका कि उसकी इमारत के पास वैध कंप्लीशन सर्टिफिकेट है।”

अदालत ने कहा कि:

• बिना अनुमति निर्माण करना आम प्रवृत्ति बन गई है

• अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही से यह स्थिति बनी

• कानून का पालन करने वालों के साथ यह अन्याय है

• अवैध निर्माण को ‘नियमित’ करना अधिकार नहीं, अपवाद है

कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा “बुलडोज़र जस्टिस” पर जो टिप्पणियां की गई थीं, वे इस मामले पर लागू नहीं होतीं, क्योंकि यहां निर्माण शुरू से ही गैरकानूनी पाए गए हैं।

कोर्ट ने माना कि केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार हैं।

फैसले में कहा गया कि-

“इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण बिना प्रशासन की मिलीभगत या गंभीर लापरवाही के संभव नहीं है।”

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अदालत का अंतिम फैसला

सभी दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि:

• 14 जनवरी 2026 का आदेश बरकरार रहेगा

• तोड़फोड़ पर कोई रोक नहीं लगेगी

• अंतरिम अर्ज़ियां खारिज की जाती हैं

• हालांकि, कोई जुर्माना नहीं लगाया गया

अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि जिन निर्माणों के पास वैध अनुमति और कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं हैं, उन्हें बचाया नहीं जा सकता।

Case Title: Rakesh Kumar Jha vs State of Jharkhand & Ors.

Case No.: W.P. (PIL) No. 2078 of 2018

Decision Date: 28 January 2026

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