Logo

सप्लायर की चूक का खामियाजा खरीदार क्यों भुगते? ₹1.11 करोड़ ITC मामले में त्रिपुरा हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

M/s साहिल एंटरप्राइजेज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य - त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि आपूर्तिकर्ता की चूक के कारण वास्तविक जीएसटी खरीदारों को आईटीसी से वंचित नहीं किया जा सकता है; धारा 16(2)(सी) को कम करके पढ़ा।

सप्लायर की चूक का खामियाजा खरीदार क्यों भुगते? ₹1.11 करोड़ ITC मामले में त्रिपुरा हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने जीएसटी व्यवस्था से जुड़े एक बड़े और व्यावहारिक सवाल पर साफ रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यापारी ईमानदारी से टैक्स चुकाकर माल खरीदता है, तो सप्लायर की चूक के कारण उसे इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस मामले में CGST एक्ट की धारा 16(2)(c) की व्याख्या को सीमित करते हुए उसे “रीड डाउन” किया है और कर विभाग के आदेश को रद्द कर दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला M/s साहिल एंटरप्राइजेज से जुड़ा है, जो रबर उत्पादों का व्यापार करता है। याचिकाकर्ता ने जुलाई 2017 से जनवरी 2019 के बीच एक सप्लायर से माल खरीदा और उस पर लागू जीएसटी की पूरी राशि अदा की। कुल मिलाकर, यह टैक्स राशि ₹1.11 करोड़ से अधिक थी।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट ने IFGL Refractories को राहत दी, ओडिशा औद्योगिक नीति के तहत सब्सिडी रोकना गलत ठहराया

बाद में जीएसटी विभाग की जांच में यह सामने आया कि सप्लायर ने खरीदारों से टैक्स तो वसूला, लेकिन सरकार के पास जमा नहीं कराया। सप्लायर ने बिक्री की जानकारी तो रिटर्न में दिखाई, लेकिन टैक्स भुगतान के कॉलम में ‘शून्य’ रिटर्न दाखिल किया।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

इसके आधार पर विभाग ने साहिल एंटरप्राइजेज का ITC ब्लॉक कर दिया और कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए टैक्स, ब्याज और पेनल्टी की मांग की।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने सभी वैध दस्तावेजों के साथ खरीदारी की, सप्लायर को पूरा टैक्स चुकाया और कानून के अनुसार ITC लिया। उसने यह भी दलील दी कि मौजूदा जीएसटी सिस्टम में किसी खरीदार के पास यह जांचने का कोई तरीका नहीं है कि सप्लायर ने वाकई सरकार को टैक्स जमा किया या नहीं।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सप्लायर की गलती के लिए खरीदार को जिम्मेदार ठहराना न सिर्फ अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह दोहरी कर वसूली के समान भी है।

सरकार का पक्ष

कर विभाग ने कोर्ट में कहा कि CGST एक्ट की धारा 16(2)(c) स्पष्ट है। इसके अनुसार ITC तभी मिल सकता है, जब सप्लायर द्वारा वसूला गया टैक्स वास्तव में सरकार को जमा किया गया हो। विभाग का तर्क था कि टैक्स कानूनों में अदालतों को दखल देने में संयम बरतना चाहिए और ITC कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि कानून के तहत दी गई सुविधा है।

Read also:- सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय जांच पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, MSWC का रिकवरी आदेश रद्द

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति एस. दत्ता पुरकायस्थ की पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद व्यावहारिक पहलू पर जोर दिया।

कोर्ट ने कहा,

“किसी खरीदार से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह यह सुनिश्चित करे कि सप्लायर ने सरकार को टैक्स जमा किया है या नहीं। यह उसके नियंत्रण से बाहर की बात है।”

अदालत ने यह भी माना कि ITC की मूल भावना दोहरी कराधान से बचाव की है। अगर खरीदार ने एक बार टैक्स चुका दिया है और फिर ITC से वंचित किया जाता है, तो यह अप्रत्यक्ष रूप से उसे दो बार टैक्स देने के लिए मजबूर करता है।

पीठ ने साफ कहा कि कानून को इस तरह नहीं पढ़ा जा सकता, जिससे ईमानदार करदाता को अनुचित नुकसान पहुंचे।

Read also:- प्रारंभिक परीक्षा में छूट लेने वाले आरक्षित अभ्यर्थी को जनरल कैडर का हक नहीं: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

अदालत का निर्णय

हाईकोर्ट ने धारा 16(2)(c) को असंवैधानिक घोषित नहीं किया, लेकिन उसकी व्याख्या को सीमित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि:

• यह धारा ईमानदार और वास्तविक लेनदेन वाले मामलों में ITC रोकने के लिए इस्तेमाल नहीं की जा सकती।

• इसे केवल उन्हीं मामलों में लागू किया जा सकता है, जहां लेनदेन फर्जी, मिलीभगत वाला या धोखाधड़ी से जुड़ा हो।

• साहिल एंटरप्राइजेज के मामले में लेनदेन वास्तविक और bona fide था।

इसके साथ ही अदालत ने सहायक आयुक्त द्वारा पारित ITC अस्वीकृति का आदेश रद्द कर दिया और विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को ₹1.11 करोड़ से अधिक का ITC तुरंत बहाल किया जाए।

Case Title:- M/s Sahil Enterprises v. Union of India & Others

Case Number: WP(C) No. 688 of 2022

Download Order

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates