Logo

सुप्रीम कोर्ट का 2026 एजेंडा: दस बड़े मामले जो कानून, अधिकार और शासन की दिशा तय कर सकते हैं

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

From online gaming and elections to religious freedom, here are the top Supreme Court cases likely to shape India’s laws and rights in 2026.

सुप्रीम कोर्ट का 2026 एजेंडा: दस बड़े मामले जो कानून, अधिकार और शासन की दिशा तय कर सकते हैं

साल 2026 की शुरुआत के साथ ही भारत के Supreme Court of India में सुनवाई का माहौल खासा गंभीर दिख रहा है। सूचीबद्ध मामलों की संख्या अधिक है और कई याचिकाएँ ऐसी हैं जिनका असर सीधे नागरिक अधिकारों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और देश की कानूनी व्यवस्था पर पड़ेगा।

ऑनलाइन गेमिंग, धर्मांतरण कानून, चुनावी प्रक्रिया, न्यायिक जवाबदेही और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर फैसले आने वाले समय में नीतियों और कानूनों की दिशा तय कर सकते हैं। अदालत से जुड़े वकीलों का कहना है कि यह साल संवैधानिक दृष्टि से बेहद अहम रहने वाला है।

Read also:- 2026 में सुप्रीम कोर्ट के पाँच जज होंगे सेवानिवृत्त, न्यायिक नियुक्तियों पर रहेगा खास फोकस

नीचे 2026 में सुप्रीम कोर्ट के सामने आने वाले प्रमुख मामलों पर एक नज़र है।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

1. ऑनलाइन गेमिंग एक्ट को चुनौती

प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट, 2025 की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। हेड डिजिटल वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने दलील दी है कि कौशल आधारित खेलों-जैसे रमी और पोकर-को जुए के समान नहीं माना जा सकता।

याचिका में जांच और प्रवर्तन से जुड़े प्रावधानों को चुनौती दी गई है और अंतिम फैसले तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक की मांग की गई है।

2. रेलवे भूमि अतिक्रमण विवाद

दिल्ली के गफूर बस्ती, ढोलक बस्ती और इंदिरा नगर इलाके की लगभग 29 एकड़ रेलवे भूमि से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट फिर विचार करेगा। पहले दिए गए बेदखली आदेशों से करीब 50,000 लोगों के प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।

अदालत पहले ही सामूहिक बेदखली पर रोक लगा चुकी है। जनवरी 2026 में इस मामले की सुनवाई संभव है।

3. धर्मांतरण विरोधी कानून

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और हरियाणा जैसे राज्यों के धर्मांतरण कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाएँ लंबित हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक आज़ादी और निजता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं। अदालत के सामने यह भी तर्क रखा गया है कि कुछ राज्य इन कानूनों को और सख्त बना रहे हैं।

4. जस्टिस यशवंत वर्मा जांच मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने उनके खिलाफ गठित जांच समिति की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

यह मामला उनके सरकारी आवास पर आग की घटना के बाद कथित रूप से नकदी मिलने से जुड़ा है। याचिका में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित समिति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

5. मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण (SIR)

चुनाव आयोग द्वारा कराए गए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर याचिकाकर्ताओं ने मताधिकार प्रभावित होने की आशंका जताई है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई, लेकिन पारदर्शिता और सुरक्षा उपायों पर सुनवाई के लिए सहमति दी। यह प्रक्रिया अब कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ा दी गई है।

6. नए दंड संहिता में देशद्रोह जैसा प्रावधान

भारतीय न्याय संहिता की धारा 152, जिसने IPC का स्थान लिया है, को राजद्रोह को एक नए रूप में पुनर्जीवित करने के आरोप में चुनौती दी जा रही है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रावधान संप्रभुता या एकता को खतरे में डालने वाले अस्पष्ट कृत्यों को अपराध घोषित करता है, जो पहले निरस्त किए गए राजद्रोह कानून की ही याद दिलाता है। इस मामले को इसी तरह की अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ा गया है।

7. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कानून

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 को लेकर सवाल उठे हैं। कानून में मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर रखा गया है।

याचिकाओं में कहा गया है कि यह कदम चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करता है और 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत है।

8. आवारा कुत्तों से जुड़ा मामला

दिल्ली-एनसीआर में कुत्तों के हमलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए यह मामला शुरू किया था।

स्थायी आश्रय के पुराने निर्देश में बदलाव करते हुए अदालत ने नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को छोड़ने की अनुमति दी। अब यह मामला पूरे देश तक बढ़ा दिया गया है। अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को है।

9. इंडियाबुल्स और बैंक-बिल्डर गठजोड़

इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस (अब सम्माण कैपिटल) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी जारी है।

अदालत ने सेबी और एसएफआईओ जैसी एजेंसियों की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं और सीबीआई निदेशक से विशेष जांच टीम पर विचार करने को कहा है।

10. वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025

करीब 65 याचिकाओं में वक्फ संशोधन कानून को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून धार्मिक संस्थाओं के स्वशासन के अधिकार का उल्लंघन करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कलेक्टरों को दिए गए व्यापक अधिकारों और कुछ अन्य प्रावधानों पर रोक लगा दी है।

इन सभी मामलों से साफ है कि 2026 सुप्रीम कोर्ट के लिए बेहद निर्णायक वर्ष हो सकता है। कई अहम सुनवाइयाँ साल की शुरुआत में ही तय हैं और इनके फैसले देश की संवैधानिक दिशा को लंबे समय तक प्रभावित करेंगे।

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates