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सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमों के स्थगन के लिए सख्त नियम बनाए; बार-बार किए जाने वाले अनुरोधों पर रोक लगाई

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सुप्रीम कोर्ट ने मामलों में देरी रोकने के लिए एडजर्नमेंट मांगने की प्रक्रिया सख्त की। अब केवल विशेष परिस्थितियों में ही तारीख बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमों के स्थगन के लिए सख्त नियम बनाए; बार-बार किए जाने वाले अनुरोधों पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में बार-बार होने वाली तारीख बढ़ाने की मांग (adjournment) पर रोक लगाने के लिए नई प्रक्रिया जारी की है। 18 मार्च 2026 को जारी सर्कुलर में अदालत ने साफ किया कि अब मामलों में अनावश्यक देरी को कम करने के लिए सख्त नियम लागू होंगे।

नए निर्देशों में पहले जारी नवंबर और दिसंबर 2025 के सर्कुलर को निरस्त कर दिया गया है और उनकी जगह नई व्यवस्था लागू की गई है। यह निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर जारी किए गए हैं।

एडजर्नमेंट मांगने के लिए नई प्रक्रिया

सर्कुलर के अनुसार, यदि किसी मामले में तारीख बढ़ाने की मांग करनी है तो एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) या स्वयं पक्षकार अदालत में पत्र भेज सकते हैं। लेकिन यह अनुरोध सुनवाई से एक दिन पहले सुबह 11 बजे तक करना होगा।

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साथ ही, उस पत्र की प्रति पहले से ही दूसरी पार्टी या उसके वकील को भेजना अनिवार्य होगा। यदि दूसरी तरफ को आपत्ति है तो वह दोपहर 12 बजे तक ई-मेल के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करा सकती है, जिसे अदालत के समक्ष रखा जाएगा।

केवल विशेष परिस्थितियों में ही मिलेगी तारीख

अदालत ने स्पष्ट किया कि अब केवल असाधारण परिस्थितियों में ही तारीख बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर परिवार में मृत्यु, वकील या पक्षकार की गंभीर बीमारी जैसी स्थिति।

इसके अलावा, आवेदन में यह भी बताना होगा कि मामले में पहले कितनी बार तारीख ली जा चुकी है।

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नए मामलों में सिर्फ एक बार मिलेगी छूट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नए मामलों में पत्र के माध्यम से सिर्फ एक बार ही तारीख बढ़ाने का अनुरोध किया जा सकेगा।

साथ ही, लगातार दो बार तारीख बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी जब तक कि मामला अदालत के सामने सूचीबद्ध न किया जाए। वहीं रेगुलर मामलों में पत्र भेजकर तारीख बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

अदालत ने यह भी कहा कि एडजर्नमेंट के लिए निर्धारित प्रारूप में आवेदन ई-मेल के जरिए भेजना होगा, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहे।

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