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सबूतों की कड़ी कमजोर: सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल बाद झारखंड कांस्टेबल को बरी किया

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के कांस्टेबल को 2014 हत्या मामले में बरी किया, कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर्याप्त नहीं थे और संदेह का लाभ आरोपी को मिला। - जय प्रकाश यादव बनाम झारखंड राज्य

सबूतों की कड़ी कमजोर: सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल बाद झारखंड कांस्टेबल को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में झारखंड के एक कांस्टेबल को हत्या के मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष सबूतों की मजबूत कड़ी साबित करने में असफल रहा, जिससे दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला जय प्रकाश यादव बनाम झारखंड राज्य से जुड़ा है। घटना 18 मई 2014 की है, जब भारतीय रिजर्व बटालियन के कैंप में एक सब-इंस्पेक्टर की गोली लगने से मृत्यु हो गई थी।

अभियोजन के अनुसार, आरोपी कांस्टेबल पर आरोप था कि उसने अपने वरिष्ठ अधिकारी को छुट्टी न मिलने के कारण गोली मारी। ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में झारखंड हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य गवाह (PW-3) की गवाही पर खास ध्यान दिया।

अदालत ने पाया कि गवाह ने पहले दावा किया कि उसने आरोपी को हथियार के साथ देखा, लेकिन जिरह के दौरान उसने माना कि घटना के समय अंधेरा था और वह साफ तौर पर पहचान नहीं कर सका।

“गवाह ने आरोपी की पहचान स्पष्ट रूप से देखने के बजाय आवाज के आधार पर की,” पीठ ने कहा।

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अदालत ने यह भी नोट किया कि इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी (eyewitness) नहीं था और पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (circumstantial evidence) पर आधारित था।

अन्य गवाहों की गवाही या तो सुनी-सुनाई थी या वे अभियोजन का समर्थन नहीं कर पाए।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में हर कड़ी का मजबूत होना जरूरी है।

“सिर्फ संदेह के आधार पर दोष सिद्ध करना सुरक्षित नहीं है,” कोर्ट ने स्पष्ट किया।

हथियार से जुड़े सबूतों में भी अस्पष्टता थी। यह स्पष्ट नहीं हो सका कि घटना के समय आरोपी के पास वही हथियार था या नहीं।

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कोर्ट ने यह भी कहा कि अनुशासित बल में हथियारों का लंबे समय तक बदल जाना सहज रूप से स्वीकार्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि उपलब्ध सबूत आरोपी के खिलाफ आरोप को पूरी तरह सिद्ध नहीं करते।

“रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह दर्शाए कि अपराध आरोपी ने ही किया,” पीठ ने कहा।

इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसलों को रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

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अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि लगभग 12 साल से हिरासत में रह रहे आरोपी को तुरंत रिहा किया जाए, यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो।

Case Title: Jay Prakash Yadav vs. State of Jharkhand

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