Logo

सुप्रीम कोर्ट: पेंशनर्स को महंगाई भत्ता (DA) से कम महंगाई राहत (DR) देना असंवैधानिक

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि DA और DR की अलग-अलग दरें असंवैधानिक हैं क्योंकि दोनों का उद्देश्य महंगाई से राहत देना है। - केरल राज्य बनाम एम. विजयकुमार एवं अन्य।

सुप्रीम कोर्ट: पेंशनर्स को महंगाई भत्ता (DA) से कम महंगाई राहत (DR) देना असंवैधानिक

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि जब महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का उद्देश्य समान है, तो उनके बढ़ोतरी की दर अलग-अलग नहीं हो सकती। अदालत ने कहा कि ऐसा करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला केरल राज्य बनाम एम. विजयकुमार और अन्य से जुड़ा है।

केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने याचिका दायर कर कहा कि उन्हें दिए जाने वाले DR की वृद्धि दर (11%) कर्मचारियों को दिए गए DA (14%) से कम है।

Read also:- घोर विलंब न्याय को विफल करता है: सर्वोच्च न्यायालय ने 31 साल पुराने भूमि मामले में पुनर्विचार आदेश रद्द किया

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

उनका तर्क था कि दोनों का उद्देश्य महंगाई से राहत देना है, इसलिए अलग-अलग दरें देना अनुचित और भेदभावपूर्ण है।

शुरुआत में सिंगल जज ने याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस निर्णय को पलटते हुए इसे असंवैधानिक माना।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच (न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले) ने कहा कि:

“महंगाई का प्रभाव सेवा में कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों पर समान रूप से पड़ता है।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि DA और DR का मूल उद्देश्य एक ही है-महंगाई के प्रभाव को संतुलित करना।

Read also:- समान परिस्थितियों में भिन्न व्यवहार भेदभाव है: सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति से वंचित कर्मचारी को राहत दी

“जब उद्देश्य समान है और महंगाई सूचकांक भी एक ही है, तो वृद्धि दर में अंतर का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है।”

कोर्ट ने अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा भेदभाव मनमाना और असंवैधानिक है।

राज्य सरकार और KSRTC ने दलील दी कि:

• सेवारत कर्मचारी और पेंशनर्स अलग-अलग वर्ग हैं

• वित्तीय स्थिति को देखते हुए अलग दर तय की गई

लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

• वर्गीकरण तभी मान्य है जब उसका उद्देश्य से सीधा संबंध हो

• यहां उद्देश्य (महंगाई से राहत) दोनों के लिए समान है

• इसलिए अलग-अलग दर तय करना तर्कसंगत नहीं है

“अलग दरें तय करना उद्देश्य से कोई तार्किक संबंध नहीं रखता और यह स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है।”

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए केरल सरकार और KSRTC की अपील खारिज कर दी।

Read also:- वकील फीस का विवाद क्लाइंट के अधिकारों को नहीं रोक सकता: केरल हाईकोर्ट ने ₹50,000 का जुर्माना लगाया

अदालत ने कहा कि DA और DR की वृद्धि दर में अंतर करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है और यह असंवैधानिक है।

Case details

Case Title: The State of Kerala vs. M. Vijayakumar & Ors.

Case Number: Civil Appeal (arising out of SLP (C) Nos. 11592–11593 of 2023) with SLP (C) No. 18030 of 2023

Judge: Justice Manoj Misra and Justice Prasanna B. Varale

Decision Date: 10 April 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates