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एक्स-पार्टी फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बिना मुद्दे तय किए सुनवाई, ट्रायल अमान्य; केस दोबारा सुनवाई के लिए वापस

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक्स-पार्टी मामलों में भी “निर्णय के बिंदु” तय करना जरूरी है; बिना इसके दिया गया फैसला अवैध होगा। - प्रमोद श्रॉफ बनाम मोहन सिंह चोपड़ा

एक्स-पार्टी फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बिना मुद्दे तय किए सुनवाई, ट्रायल अमान्य; केस दोबारा सुनवाई के लिए वापस

सुप्रीम कोर्ट ने एक्स-पार्टी (एकतरफा) सिविल मामलों में ट्रायल कोर्ट की जिम्मेदारियों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही प्रतिवादी उपस्थित न हो, फिर भी न्यायालय को “निर्णय के बिंदु” तय कर कारण सहित फैसला देना अनिवार्य है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद कोलकाता स्थित एक फ्लैट के लिए हुए एग्रीमेंट टू सेल से जुड़ा था। अपीलकर्ता ने दावा किया कि उसने 1977 में संपत्ति खरीदने के लिए लगभग पूरी रकम अदा कर दी थी और कब्जा भी ले लिया था, लेकिन विक्रेता ने रजिस्ट्री पूरी नहीं की।

इसके बाद अपीलकर्ता ने विशेष निष्पादन (specific performance) के लिए सिविल मुकदमा दायर किया। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए मुकदमा खारिज कर दिया कि अपीलकर्ता प्रतिवादी के टाइटल (मालिकाना हक) को साबित नहीं कर पाया।

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हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के प्रावधानों का विस्तार से विश्लेषण किया।

कोर्ट ने कहा कि:

“भले ही प्रतिवादी उपस्थित न हो, न्यायालय को मामले के ‘निर्णय के बिंदु’ तय कर उन पर कारण सहित निर्णय देना होगा।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मुद्दे (issues) फ्रेम करना हर मामले में अनिवार्य नहीं है, लेकिन निर्णय लिखते समय “points for determination” तय करना जरूरी है।

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एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा गया:

“सिर्फ इस आधार पर डिक्री नहीं दी जा सकती कि प्रतिवादी अनुपस्थित है; न्यायालय को दावों की सत्यता जांचनी होगी।”

कोर्ट ने पाया कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने न तो कोई मुद्दा तय किया और न ही यह बताया कि किन प्रश्नों पर फैसला दिया जा रहा है।

इसका परिणाम यह हुआ कि:

• अपीलकर्ता को यह पता ही नहीं था कि उसे किन बिंदुओं पर साक्ष्य देना है

• टाइटल का प्रश्न बिना किसी स्पष्ट मुद्दे के आधार पर तय कर दिया गया

कोर्ट ने कहा:

“जब किसी मुद्दे पर पक्षकार को न तो सूचना दी गई हो और न ही साक्ष्य देने का अवसर मिला हो, तो यह उसके साथ अन्याय है।”

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इन सभी तथ्यों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों के फैसलों को कानून के अनुरूप न मानते हुए रद्द कर दिया।

कोर्ट ने आदेश दिया कि:

• मामला ट्रायल कोर्ट को वापस भेजा जाए

• दोनों पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए

• विधिवत मुद्दे तय किए जाएं

• साक्ष्य लेने के बाद नए सिरे से निर्णय दिया जाए

साथ ही, कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामला लंबित होने के कारण इसे शीघ्र निपटाया जाए।

Case Details

Case Title: Pramod Shroff v. Mohan Singh Chopra

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 20779 of 2025

Judges: Justice Sanjay Karol and Justice Augustine George Masih

Decision Date: April 16, 2026

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