Logo

गलत ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों के कारण उम्मीदवारों को उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पदों से वंचित होना पड़ा - सुप्रीम कोर्ट

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गलत वित्तीय वर्ष वाले EWS प्रमाणपत्र पर आरक्षण नहीं मिलेगा। हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए सभी अपीलें खारिज कर दीं। - पूनम द्विवेदी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य।

गलत ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों के कारण उम्मीदवारों को उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पदों से वंचित होना पड़ा - सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी की स्वास्थ्यकर्मी भर्ती में EWS प्रमाणपत्र से जुड़े विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि EWS प्रमाणपत्र विज्ञापन में मांगे गए वित्तीय वर्ष से मेल नहीं खाता, तो उम्मीदवार आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने 15 दिसंबर 2021 को महिला स्वास्थ्यकर्मी के 9,212 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसमें 10% सीटें EWS श्रेणी के लिए आरक्षित थीं। उम्मीदवारों को 5 जनवरी 2022 तक आवेदन करना था।

Read also:- सहकर्मी की छाती को घूरना अनुचित हो सकता है, लेकिन आईपीसी की धारा 354-सी के तहत अपराध नहीं: बॉम्बे हाई कोर्ट ने FIR रद्द की

अपीलकर्ताओं - जिनमें पूनम द्विवेदी, सुनीता कुमारी, शानू तिवारी, कोमल, अर्चना सक्सैना और अनुराधा श्रीवास्तव शामिल थीं - ने EWS कोटे में आवेदन किया और परीक्षा भी पास की, लेकिन अंतिम चयन सूची में उनका नाम नहीं आया।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

उनका तर्क था कि उन्होंने वैध EWS प्रमाणपत्र जमा किए थे, जबकि आयोग ने कहा कि प्रमाणपत्र सही वित्तीय वर्ष (2020–21) से संबंधित नहीं थे।

अपीलकर्ताओं ने कहा कि EWS प्रमाणपत्र सरकारी अधिकारी जारी करते हैं, इसलिए यदि कोई गलती है तो उसकी जिम्मेदारी राज्य की है। वहीं आयोग ने कहा कि विज्ञापन के अनुसार प्रमाणपत्र वित्तीय वर्ष 2020–21 से संबंधित होना चाहिए था और कट-ऑफ तारीख तक मान्य होना जरूरी था।

Read also:- राणा अय्यूब ट्वीट विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट में X की जवाबदेही पर सवाल, सेफ हार्बर पर संकट

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा:

“यदि किसी विशेष वित्तीय वर्ष के लिए प्रमाणपत्र मांगा गया है, तो दूसरे वित्तीय वर्ष का प्रमाणपत्र पात्रता को प्रभावित करता है।”

Read also:- लोकसभा जांच के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दिया

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों को विज्ञापन जारी होने के बाद नया प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहिए था। कुछ प्रमाणपत्र विज्ञापन से पहले ही जारी हो चुके थे और संबंधित वित्तीय वर्ष पूरा भी नहीं हुआ था।

अदालत ने माना कि गलत या अप्रासंगिक वित्तीय वर्ष वाले प्रमाणपत्र के आधार पर EWS आरक्षण का दावा नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपीलें खारिज कर दी गईं।

Case Title: Poonam Dwivedi & Ors. vs State of U.P. & Ors.

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates