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सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश एक्साइज केस में कारोबारी को दी अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट का आदेश किया रद्द

Vivek G.
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मनोज कुमार मुत्ता बनाम आंध्र प्रदेश राज्यसुप्रीम कोर्ट ने नकली शराब मामले में कारोबारी मनोज कुमार मुत्ता को अग्रिम जमानत दी और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश एक्साइज केस में कारोबारी को दी अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट का आदेश किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने कथित नकली शराब निर्माण से जुड़े एक मामले में कारोबारी मनोज कुमार मुत्ता को बड़ी राहत देते हुए अग्रिम जमानत दे दी है। अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों को देखते हुए अपील स्वीकार की जाती है और गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपी को अग्रिम जमानत दी जाएगी।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला आंध्र प्रदेश के एनटीआर जिले में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें कथित रूप से नकली शराब के निर्माण और सप्लाई का आरोप लगाया गया था।

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जांच एजेंसियों के अनुसार, 6 अक्टूबर 2025 को एक्साइज अधिकारियों ने रवि किराना जनरल स्टोर और उसके पास स्थित एक गोदाम पर छापा मारा। इस कार्रवाई में लगभग 7800 बोतल नकली शराब, करीब 3325 लीटर स्पिरिट मिश्रण और बोतलिंग से जुड़ी मशीनरी बरामद की गई।

इसके बाद अधिकारियों ने ए.एन.आर. रेस्टोरेंट एंड बार परिसर में भी छापा डाला, जहां कथित तौर पर स्पिरिट, पानी और अन्य पदार्थ मिलाकर Old Admiral Brandy और Kerala Malt Whiskey जैसे ब्रांड की नकली शराब तैयार की जा रही थी।

जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि इस अवैध गतिविधि में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक बोतलें और कैप्स आरोपी मनोज कुमार मुत्ता के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थीं। इसी आधार पर उन्हें बाद में एफआईआर में आरोपी के रूप में जोड़ा गया।

आरोपी का पक्ष

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि मनोज कुमार मुत्ता का नाम शुरुआत में एफआईआर में शामिल नहीं था और उनकी पहचान को लेकर भी भ्रम की स्थिति रही।

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उन्होंने यह भी कहा कि:

“न तो उनके कारोबारी प्रतिष्ठान पर कोई छापा पड़ा और न ही उनका ए.एन.आर. रेस्टोरेंट एंड बार से कोई संबंध है।”

वकील ने अदालत को यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 6 जनवरी 2026 को उन्हें अंतरिम गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था और इसके बाद उन्होंने जांच अधिकारी के सामने कई बार उपस्थित होकर जांच में पूरा सहयोग किया।

राज्य सरकार का तर्क

राज्य की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि यह नकली शराब के बड़े नेटवर्क से जुड़ा गंभीर मामला है।

सरकार का कहना था कि गवाहों के बयान और कॉल रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि आरोपी ने नकली शराब के निर्माण के लिए बोतलें और कैप्स उपलब्ध कराए थे।

सरकार ने अदालत से कहा कि पूरे नेटवर्क और पैसों के लेन-देन की जांच के लिए आरोपी की हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों पर गौर किया। अदालत ने पाया कि:

• आरोपी का नाम शुरुआत में एफआईआर में नहीं था

• उसके कारोबार वाले स्थान पर कोई छापा नहीं पड़ा

• जिन स्थानों पर छापे पड़े, उनका आरोपी से सीधा संबंध नहीं था

• आरोपी को पहले अंतरिम सुरक्षा दी गई थी और उसने जांच में सहयोग किया

पीठ ने कहा:

“रिकॉर्ड से यह भी नहीं दिखता कि आरोपी ने अदालत द्वारा दी गई स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया हो।”

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अदालत का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के 5 दिसंबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी होती है तो उसे अग्रिम जमानत पर रिहा किया जाएगा। साथ ही यह शर्त भी लगाई गई कि आरोपी जांच और ट्रायल के दौरान पूरा सहयोग करेगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।

Case Title: Manoj Kumar Mutta vs State of Andhra Pradesh

Case No.: Criminal Appeal No. 1263 of 2026 (Arising out of SLP (Crl.) No. 20419 of 2025)

Decision Date: 10 March 2026

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