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सेनवैट क्रेडिट पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत: केसर एंटरप्राइजेज को मेंटेनेंस आइटम्स पर मिला टैक्स लाभ

Vivek G.
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केसर एंटरप्राइजेज लिमिटेड बनाम आयुक्त, सीमा शुल्क, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सेवा कर, मेरठ-II, सुप्रीम कोर्ट ने Kesar Enterprises मामले में फैसला सुनाते हुए मेंटेनेंस में उपयोग वस्तुओं पर Cenvat Credit की अनुमति दी। पढ़ें पूरा आदेश।

सेनवैट क्रेडिट पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत: केसर एंटरप्राइजेज को मेंटेनेंस आइटम्स पर मिला टैक्स लाभ

नई दिल्ली की ठंडी सुबह में सुप्रीम कोर्ट कक्ष संख्या 3 में जब मामला पुकारा गया, तो बहस लंबी नहीं चली। मामला था - क्या फैक्ट्री के रखरखाव में इस्तेमाल होने वाली वेल्डिंग इलेक्ट्रोड और अन्य सामान पर Cenvat Credit (इनपुट टैक्स क्रेडिट) मिल सकता है?

मामला था Kesar Enterprises Limited बनाम Commissioner, Customs, Central Excise & Service Tax, Meerut-II का। पीठ में न्यायमूर्ति बी.वी. नागरथना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां बैठे थे।

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मामले की पृष्ठभूमि

कंपनी का तर्क था कि फैक्ट्री में मशीनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए जिन वस्तुओं - जैसे वेल्डिंग इलेक्ट्रोड, जॉइंटिंग शीट्स और स्टेनलेस स्टील प्लेट्स - का इस्तेमाल होता है, वे उत्पादन प्रक्रिया से जुड़ी हैं। इसलिए उन पर Cenvat Credit मिलना चाहिए।

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विभाग ने इस दावे को चुनौती दी थी। विवाद इस बात पर था कि क्या ऐसी वस्तुएं “निर्माण में प्रयुक्त” मानी जाएंगी, जबकि वे अंतिम उत्पाद का हिस्सा नहीं बनतीं।

सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता के वकील ने कहा कि यह मुद्दा पहले ही सुप्रीम कोर्ट तय कर चुका है। उन्होंने The Kisan Cooperative Sugar Factory Ltd. बनाम Commissioner, Central Excise, Meerut-I के फैसले का हवाला दिया।

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कोर्ट की टिप्पणी

न्यायालय ने पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए साफ किया कि “used in or in relation to manufacture” यानी “निर्माण में या उससे संबंधित उपयोग” शब्दों की व्याख्या बहुत व्यापक है।

फैसले के ऑपरेटिव हिस्से को पढ़ते हुए कोर्ट ने दोहराया कि,

“निर्माण प्रक्रिया में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुएं इसके दायरे में आती हैं, चाहे वे अंतिम उत्पाद का हिस्सा बनें या नहीं।”

पीठ ने आगे कहा कि मशीनों की मरम्मत और रखरखाव में उपयोग की गई वस्तुएं भी उत्पादन प्रक्रिया से जुड़ी मानी जाएंगी।

विभाग की ओर से पेश वकील ने भी निष्पक्ष रूप से माना कि मौजूदा मामले पर पूर्व निर्णय पूरी तरह लागू होता है।

कोर्ट ने कहा,

“हम बार में की गई इस स्वीकारोक्ति को रिकॉर्ड पर लेते हैं और अपीलों को पूर्व निर्णय के अनुरूप स्वीकार करते हैं।”

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आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों सिविल अपीलों को पूर्व निर्णय के आधार पर मंजूर कर लिया। इसके साथ ही लंबित आवेदन भी समाप्त माने गए।

यह आदेश 10 फरवरी 2026 को पारित किया गया।

Case Title: Kesar Enterprises Limited vs Commissioner, Customs, Central Excise & Service Tax, Meerut-II

Case No.: Civil Appeal No. 1479 of 2026 (Arising out of SLP (C) No. 621 of 2017) & Civil Appeal No. 1480 of 2026 (Arising out of SLP (C) No. 8909 of 2020)

Case Type: Civil Appeal (Indirect Tax – Cenvat Credit)

Decision Date: 10 February 2026

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