Logo

सुप्रीम कोर्ट ने केरल तकनीकी शिक्षा सेवा विवाद में प्रोफेसरों को राहत दी, हाईकोर्ट आदेश सीमित किया

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

डॉ. जिजी के.एस. एवं अन्य बनाम शिबू के एवं अन्य, सुप्रीम कोर्ट ने केरल तकनीकी शिक्षा सेवा विवाद में प्रोफेसरों को राहत दी, कहा हाईकोर्ट आदेश से उनकी पदोन्नति प्रभावित नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने केरल तकनीकी शिक्षा सेवा विवाद में प्रोफेसरों को राहत दी, हाईकोर्ट आदेश सीमित किया

नई दिल्ली में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने केरल तकनीकी शिक्षा सेवा से जुड़े लंबे विवाद में अहम फैसला सुनाया। अदालत ने साफ किया कि जिन शिक्षकों को पहले उसके आदेश के आधार पर पदोन्नति मिली थी, उनके करियर पर हाईकोर्ट के बाद के आदेश का कोई असर नहीं पड़ेगा।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए आदेश की अंतिमता को कोई निचली अदालत प्रभावित नहीं कर सकती।

Read also:-रूह अफजा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी में 12.5% नहीं, 4% VAT लगेगा फल पेय के रूप में

मामले की पृष्ठभूमि

विवाद की जड़ 2004 में जोड़े गए नियम 6A से जुड़ी है, जो केरल तकनीकी शिक्षा सेवा (संशोधन) नियमों में शामिल किया गया था। इस नियम के तहत कुछ शिक्षकों को पीएचडी डिग्री की अनिवार्यता से छूट दी गई थी या उसे प्राप्त करने के लिए समय दिया गया था।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

इस नियम को पहले केरल हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सिंगल जज और बाद में डिवीजन बेंच ने इसे निरस्त कर दिया था।

मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘Christy James Jose बनाम State of Kerala’ मामले में हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया। अदालत ने माना कि नियुक्तियां AICTE की अधिसूचनाओं के अनुरूप थीं।

इसके बाद अपीलकर्ताओं-डॉ. जिजी के.एस. और अन्य-को भी उसी आधार पर राहत मिली। राज्य सरकार ने 2019 में सरकारी आदेश जारी कर उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर पद पर पदोन्नति दी, वह भी पूर्व प्रभाव से।

Read also:-40 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में दोषियों को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

हाईकोर्ट का आदेश

बाद में कुछ अन्य शिक्षकों ने Kerala Administrative Tribunal में मूल आवेदन दायर कर कई सरकारी आदेशों को चुनौती दी। अधिकरण ने 2020 में कुछ पदोन्नतियों और प्रतिनियुक्तियों को रद्द कर दिया।

यह आदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। 3 दिसंबर 2020 को हाईकोर्ट ने विस्तृत फैसला देते हुए कहा कि 5 मार्च 2010 के बाद प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए पीएचडी अनिवार्य है।

हालांकि, इस प्रक्रिया में वे शिक्षक पक्षकार नहीं थे जिन्हें पहले सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने अप्रत्यक्ष रूप से सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश को प्रभावित किया है।

पीठ ने इस तर्क से सहमति जताई। अदालत ने कहा, “जब इस न्यायालय ने अपीलकर्ताओं के पक्ष में स्पष्ट आदेश पारित किया है, तब उसकी अंतिमता को बाधित करने का अवसर उत्पन्न नहीं हो सकता था।”

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि अपीलकर्ता हाईकोर्ट में पक्षकार बनाए गए होते और सुप्रीम कोर्ट का आदेश वहां प्रस्तुत किया गया होता, तो शायद उन्हें फिर से सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

Read also:-40 साल पुराने दोहरे हत्याकांड में दोषियों को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

संबंधित विशेष अनुमति याचिका में एक अन्य शिक्षक ने शिकायत की कि हाईकोर्ट के आदेश से उनकी पदोन्नति की तिथि प्रभावित हुई है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस संदर्भ में अपने पुराने फैसलों-K. Ajit Babu बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और Rama Rao बनाम एम.जी. महेश्वर राव-का उल्लेख किया।

अदालत ने दोहराया कि यदि कोई व्यक्ति किसी आदेश से प्रभावित है, भले ही वह उस कार्यवाही का पक्षकार न रहा हो, तो उसके पास कानून के तहत उचित मंच पर जाने का अधिकार है।

पीठ ने कहा कि ऐसे प्रभावित व्यक्तियों को कानून के अनुसार उपयुक्त मंच पर अपनी शिकायत रखने की स्वतंत्रता है।

अदालत का अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ताओं की अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के आदेश का उनके करियर या पदोन्नति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

साथ ही, अन्य याचिकाओं और हस्तक्षेप आवेदनों को यह कहते हुए निस्तारित कर दिया गया कि संबंधित पक्ष कानून के अनुसार उचित मंच पर अपनी राहत मांग सकते हैं।

फैसले के साथ यह लंबा सेवा-विवाद एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय में समाप्त हुआ।

Case Title: Dr. Jiji K.S. & Ors. v. Shibu K & Ors.

Case No.: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 8737 of 2021

Decision Date: February 27, 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates