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UP गैंगस्टर्स एक्ट की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू, नए आपराधिक कानून से टकराव पर राज्य से जवाब तलब

Shivam
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सिराज अहमद खान और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य - सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 के साथ टकराव के दावों के बीच यूपी गैंगस्टर्स एक्ट की वैधता की जांच की; राज्य को जवाब देने के लिए समय दिया गया।

UP गैंगस्टर्स एक्ट की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू, नए आपराधिक कानून से टकराव पर राज्य से जवाब तलब

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। मामला इसलिए अहम है क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि यह कानून अब नए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 से टकराता है

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ताओं ने गैंगस्टर्स एक्ट की धाराओं 3, 12 और 14 से 17 के साथ-साथ 2021 में बनाए गए कुछ नियमों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि ये प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (स्वतंत्रता), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और 300-A (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं।

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साथ ही, दलील दी गई कि BNS, 2023 की धारा 111 संगठित अपराध और गिरोह आधारित अपराधों पर एक समग्र केंद्रीय कानून है, जिसके बाद राज्य का अलग कानून लागू नहीं रह सकता।

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याचिकाकर्ताओं की दलीलें

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों कानून “एक ही क्षेत्र” को नियंत्रित करते हैं। उनके अनुसार, संसद ने BNS, 2023 के माध्यम से संगठित अपराध पर एक पूर्ण कानून बना दिया है, जिससे गैंगस्टर्स एक्ट अप्रासंगिक हो जाता है।

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एक वरिष्ठ वकील ने दलील दी,

“जब संसद ने पूरे विषय पर विस्तार से कानून बना दिया है, तो समान विषय पर राज्य कानून नहीं चल सकता।”

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले Forum for People’s Collective Efforts बनाम पश्चिम बंगाल राज्य का हवाला देते हुए बताया कि दो कानूनों के बीच टकराव तय करने के लिए तीन कसौटियां निर्धारित की गई हैं।

अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने माना कि यह एक गंभीर संवैधानिक मुद्दा है। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को यह स्पष्ट करने का अवसर दिया जाना चाहिए कि क्या वास्तव में दोनों कानूनों में टकराव है।

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पीठ ने टिप्पणी की कि यह सवाल “गहन कानूनी विचार” की मांग करता है और बिना राज्य के जवाब के इस पर फैसला नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को तीन सप्ताह का समय दिया है ताकि वह BNS, 2023 की धारा 111 और गैंगस्टर्स एक्ट के बीच कथित टकराव पर अपना जवाब दाखिल कर सके। साथ ही, याचिकाकर्ताओं को लिखित दलीलें दाखिल करने की अनुमति दी गई है।

मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को तय की गई है, जब अदालत इस चुनौती पर आगे विचार करेगी।

Case Title: Siraj Ahmad Khan & Anr. v. State of Uttar Pradesh & Anr.

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