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सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश: इस्लामुद्दीन अंसारी केस में तेलंगाना FSL को बिना औपचारिकता वॉयस टेस्ट करने का आदेश

Vivek G.
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इस्लामुद्दीन अंसारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामुद्दीन अंसारी केस में तेलंगाना FSL को बिना लेटर ऑफ एडवाइस वॉयस टेस्ट करने का सख्त निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश: इस्लामुद्दीन अंसारी केस में तेलंगाना FSL को बिना औपचारिकता वॉयस टेस्ट करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामुद्दीन अंसारी मामले में सुनवाई करते हुए एक अहम आदेश पारित किया है। अदालत ने तेलंगाना फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (TGFSL), हैदराबाद को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह वॉयस सैंपल की जांच बिना किसी अतिरिक्त ‘लेटर ऑफ एडवाइस’ की औपचारिकता के करे।

कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि यह जांच पुलिस के अनुरोध पर नहीं, बल्कि अदालत के आदेश के तहत कराई जा रही है।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला विशेष अनुमति याचिका (क्रिमिनल) संख्या 14997/2025 से जुड़ा है, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2025 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।

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सुनवाई के दौरान अदालत को 12 जनवरी 2026 का एक पत्र प्राप्त हुआ, जो तेलंगाना फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के निदेशक द्वारा भेजा गया था। पत्र में कहा गया था कि जांच के लिए संबंधित ऑडियो क्लिप की ट्रांसक्रिप्शन और एक ‘लेटर ऑफ एडवाइस’ भेजा जाए, ताकि परीक्षण में सुविधा हो सके।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को आवश्यक नहीं माना।

अदालत की टिप्पणी

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह परीक्षण अदालत के आदेश के तहत हो रहा है, इसलिए किसी अलग से औपचारिक पत्र की जरूरत नहीं है।

पीठ ने कहा, “यह परीक्षण इस न्यायालय के आदेश के अनुसार किया जा रहा है, न कि पुलिस के अनुरोध पर। इसलिए ‘लेटर ऑफ एडवाइस’ की आवश्यकता नहीं है।”

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि 9 मार्च 2026 को सुबह 11 बजे याचिकाकर्ता इस्लामुद्दीन अंसारी स्वयं हैदराबाद स्थित TGFSL के निदेशक के सामने उपस्थित होंगे।

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ऑडियो क्लिप की पहचान और वॉयस सैंपल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि जब्त किया गया मोबाइल फोन कई ऑडियो क्लिप्स से भरा हो सकता है। ऐसे में जिस विशेष ऑडियो क्लिप की जांच करनी है, उसकी पहचान याचिकाकर्ता की मदद से ही संभव होगी।

इस पर अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता स्वयं उस ऑडियो क्लिप की पहचान करेंगे।

साथ ही, अदालत ने यह भी आदेश दिया कि प्रतिवादी संख्या 2, जिन पर उक्त ऑडियो क्लिप का लेखक होने का आरोप है, वे भी उसी दिन और समय पर उपस्थित हों। उनका वॉयस सैंपल लिया जाएगा, ताकि दोनों आवाज़ों की तुलना की जा सके।

पीठ ने कहा कि निदेशक को पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पूरी करनी होगी।

मोबाइल से डिलीट डेटा की जांच

मामले में यह आशंका भी जताई गई कि मोबाइल से कोई डेटा हटाया गया हो सकता है। इस पर अदालत ने TGFSL के निदेशक को निर्देश दिया कि वे जांच कर रिपोर्ट दें कि पुलिस द्वारा जब्ती के बाद मोबाइल में किसी तरह का डेटा डिलीट हुआ है या नहीं।

इसके साथ ही, संबंधित ऑडियो क्लिप की ट्रांसक्रिप्ट भी रिपोर्ट का हिस्सा होगी।

रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

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पूर्व आपराधिक कार्यवाही पर स्थिति स्पष्ट

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक आवेदन दाखिल कर यह कहा गया कि अभियोजन वापसी का उल्लेख शायद गलती से हुआ था और वास्तविकता में आगे की जांच का आवेदन था।

हालांकि, अदालत ने यह कहते हुए मुद्दा समाप्त कर दिया कि 8 दिसंबर 2025 को ही आपराधिक केस नंबर 6196/2021, जो केस क्राइम नंबर 0171/2020 से जुड़ा था, पूरी तरह रद्द किया जा चुका है।

इस प्रकार, संबंधित अंतरिम आवेदन का निस्तारण कर दिया गया।

अदालत का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि:

• 9 मार्च 2026 को दोनों पक्ष TGFSL, हैदराबाद में उपस्थित हों।

• प्रतिवादी संख्या 2 का वॉयस सैंपल लिया जाए।

• संबंधित ऑडियो क्लिप की पहचान याचिकाकर्ता की मदद से की जाए।

• किसी ‘लेटर ऑफ एडवाइस’ की आवश्यकता नहीं होगी।

• पूरी जांच निष्पक्ष रूप से कर सीलबंद रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।

मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है।

Case Title: Islamuddin Ansari vs State of U.P. & Ors.

Case No.: SLP (Crl.) No. 14997/2025

Decision Date: 12 February 2026

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