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केवल शक या आरोप पर नहीं चलेगा मुकदमा: सुप्रीम कोर्ट ने बालाजी जायसवाल के खिलाफ मामला रद्द किया

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ठोस सबूत के बिना आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप नहीं बनता, और बालाजी जायसवाल के खिलाफ केस रद्द कर दिया। - बालाजी जायसवाल बनाम छत्तीसगढ़ राज्य

केवल शक या आरोप पर नहीं चलेगा मुकदमा:  सुप्रीम कोर्ट ने बालाजी जायसवाल के खिलाफ मामला रद्द किया

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल संदेह या परिस्थितियाँ किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment) का दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने बालाजी जायसवाल के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का है, जहां 7 मई 2024 को कोमल साहू का शव पेड़ से लटका मिला था। पोस्टमॉर्टम में मौत का कारण फांसी से दम घुटना बताया गया। जांच के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि यह आत्महत्या का मामला है।

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जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि मृतक की पत्नी और आरोपी बालाजी जायसवाल के बीच कथित संबंध थे और इस कारण मृतक को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे उसने आत्महत्या कर ली। इसी आधार पर आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 34 के तहत आरोप तय किए गए।

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हाई कोर्ट ने इन आरोपों को बरकरार रखा था, जिसके खिलाफ आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने स्पष्ट किया कि धारा 306 के तहत अपराध साबित करने के लिए केवल परिस्थितिजन्य आरोप पर्याप्त नहीं हैं।

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अदालत ने कहा,

“आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध में यह जरूरी है कि आरोपी की ओर से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष उकसाने वाला कार्य (instigation) या मदद (aid) हो।”

पीठ ने यह भी पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने मृतक को आत्महत्या करने के लिए उकसाया या ऐसी स्थिति पैदा की कि उसके पास कोई विकल्प न बचा हो।

अदालत ने कहा,

“रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सामग्री नहीं है जो यह दिखाए कि आरोपी के किसी कृत्य और आत्महत्या के बीच सीधा संबंध (nexus) था।”

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साथ ही, कथित अवैध संबंधों के आरोप को भी अदालत ने पर्याप्त आधार नहीं माना, क्योंकि इससे स्पष्ट ‘mens rea’ यानी आत्महत्या के लिए उकसाने की मंशा साबित नहीं होती।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर धारा 306 के आवश्यक तत्व पूरे नहीं होते हैं और इस स्थिति में आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

अदालत ने आदेश दिया कि हाई कोर्ट का फैसला रद्द किया जाता है और सत्र न्यायालय द्वारा तय किए गए आरोप भी निरस्त किए जाते हैं।

इसके साथ ही बालाजी जायसवाल को मामले से मुक्त (discharge) कर दिया गया। हालांकि, सह-आरोपी के खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा और इस फैसले से उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

Case Details

Case Title: Balaji Jaiswal vs State of Chhattisgarh

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No.14640 of 2025

Judges: Justice K.V. Viswanathan and Justice Atul S. Chandurkar

Decision Date: April 16, 2026

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