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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री अनोश एक्का को दी राहत, सजा निलंबित कर जमानत मंजूर

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री अनोश एक्का को राहत देते हुए उनकी सजा निलंबित कर जमानत दी, यह कहते हुए कि मामलों में आरोप आंशिक रूप से समान हैं। - अनोष एक्का बनाम सीबीआई के माध्यम से राज्य

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री अनोश एक्का को दी राहत, सजा निलंबित कर जमानत मंजूर

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मंत्री अनोश एक्का को बड़ी राहत देते हुए उनकी सजा पर रोक लगा दी और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। यह मामला कथित रूप से आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले की शुरुआत वर्ष 2008 में दर्ज एक प्राथमिकी से हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि अनोश एक्का और एक अन्य मंत्री ने अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की। जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई।

जांच एजेंसियों के अनुसार, एक्का के पास प्रारंभिक रूप से लगभग 10 लाख रुपये की संपत्ति थी, लेकिन बाद में यह बढ़कर करीब 57 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर कंपनियां बनाईं और सरकारी ठेके हासिल किए। साथ ही, आदिवासी भूमि के अवैध अधिग्रहण के भी आरोप लगाए गए।

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ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2025 में उन्हें दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में उनकी सजा निलंबित करने की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि इस मामले में दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की गई हैं, जबकि आरोप एक ही अवधि और लेन-देन से जुड़े हैं। इसे उन्होंने दोहरी सजा (double jeopardy) का मामला बताया।

साथ ही, यह भी बताया गया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगभग 18 करोड़ रुपये की संपत्ति पहले ही जब्त की जा चुकी है और विवादित जमीन भी कब्जे में है।

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दूसरी ओर, CBI की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि आरोप गंभीर हैं और आरोपी ने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग किया है।

हालांकि, सुनवाई के दौरान यह भी स्वीकार किया गया कि आरोपी की कई संपत्तियां पहले ही अटैच हो चुकी हैं और जमीन भी जब्त की जा चुकी है।

कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि दोनों मामलों में कई आरोप आपस में जुड़े और समान प्रतीत होते हैं। साथ ही, यह भी ध्यान में रखा गया कि आरोपी पहले ही एक मामले में चार साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है और वर्तमान मामले में भी करीब 10 महीने की हिरासत में रहा है।

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पीठ ने कहा,

“यह पहलू कि क्या दो अलग-अलग अभियोजन उचित हैं, इस पर अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय करेगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए अनोश एक्का को जमानत देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आदेश दिया कि उन्हें सशर्त रिहा किया जाए और वह सात दिनों के भीतर यह लिखित आश्वासन देंगे कि वे आदिवासी भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत अन्य शर्तों और ट्रायल कोर्ट द्वारा तय नियमों के अधीन होगी। इसके साथ ही अपील स्वीकार कर ली गई।

Case Details

Case Title: Anosh Ekka vs State through CBI

Case Number: Criminal Appeal arising out of SLP (Crl.) No. 891 of 2026

Judge: Justice Vikram Nath, Justice Sandeep Mehta

Decision Date: April 13, 2026

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