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सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर आपसी सहमति से तलाक दिया, कहा- वैवाहिक संबंध जारी रखने का कोई मतलब नहीं

CB News Desk
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सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पति-पत्नी के बीच सुलह की कोई संभावना नहीं बची है और अनुच्छेद 142 के तहत विवाह को आपसी सहमति से समाप्त कर दिया। - श्रीमती शगुन राणा बनाम शिवम तंवर

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर आपसी सहमति से तलाक दिया, कहा- वैवाहिक संबंध जारी रखने का कोई मतलब नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एक दंपति के बीच वैवाहिक विवाद को समाप्त करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत आपसी सहमति से तलाक की डिक्री जारी कर दी। अदालत ने कहा कि जब पति-पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे हों और पुनर्मिलन की कोई संभावना न हो, तो विवाह को बनाए रखने का कोई उद्देश्य नहीं रह जाता।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता पत्नी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें फैमिली कोर्ट, गाजियाबाद में लंबित आपसी सहमति से तलाक की कार्यवाही को शीघ्र निपटाने और वैधानिक प्रतीक्षा अवधि (कूलिंग-ऑफ पीरियड) में छूट देने संबंधी राहतें देने से इनकार कर दिया गया था।

रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों का विवाह 8 जनवरी 2024 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। बाद में वैवाहिक मतभेद उत्पन्न हुए और जून 2024 से दोनों अलग-अलग रहने लगे। इसके बाद उन्होंने संयुक्त रूप से आपसी सहमति से तलाक की याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान पत्नी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से और पति व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए। अदालत ने दोनों से बातचीत की और पाया कि उनके बीच पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं है।

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न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा,

“पक्षकारों के बीच सुलह या वैवाहिक सहजीवन दोबारा शुरू होने की कोई संभावना नहीं बची है। वैवाहिक संबंध को जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि इससे केवल दोनों पक्षों की पीड़ा बढ़ेगी।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि दोनों पक्ष अपने सभी विवाद सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा चुके हैं और विवाह पूरी तरह से टूट चुका है।

पीठ ने संयुक्त आवेदन स्वीकार करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह को आपसी सहमति से समाप्त कर दिया।

इसके साथ ही फैमिली कोर्ट, गाजियाबाद में लंबित तलाक याचिका तथा उससे संबंधित सभी लंबित आवेदन भी निस्तारित मान लिए गए।

Case Details

Case Title: Smt. Shagun Rana v. Shivam Tanwar

Case Number: Special Leave Petition (C) No. 17507 of 2026

Judges: Justice J.K. Maheshwari and Justice Atul S. Chandurkar

Decision Date: May 27, 2026

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