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सुप्रीम कोर्ट ने पड़ोसी विवाद केस में दी बड़ी राहत: CCTV सबूत के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने CCTV सबूत के आधार पर पश्चिम बंगाल के एक पड़ोसी विवाद में आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। - सजल बोस बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एवं अन्य।

सुप्रीम कोर्ट ने पड़ोसी विवाद केस में दी बड़ी राहत: CCTV सबूत के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द

दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में पश्चिम बंगाल के एक पड़ोसी विवाद से जुड़े आपराधिक मामले में आरोपियों को राहत दी। कोर्ट ने पाया कि आरोपों को समर्थन देने वाले ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं, खासकर CCTV फुटेज ने अभियोजन की कहानी पर सवाल खड़े किए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 11 अक्टूबर 2022 की रात का है, जब शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनके अपार्टमेंट में जबरन प्रवेश किया, गाली-गलौज की और मारपीट की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की, जिसमें हमला, धमकी और छेड़छाड़ जैसे आरोप शामिल थे।

जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई और मामला ट्रायल कोर्ट में लंबित था। आरोपियों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कार्यवाही रद्द करने की मांग की, लेकिन हाई कोर्ट ने कुछ आरोपियों को राहत देते हुए बाकी के खिलाफ केस जारी रखने का आदेश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने जोरदार दलीलें पेश कीं। आरोपियों के वकील ने कहा कि यह मामला व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम है और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है।

उन्होंने कोर्ट को CCTV फुटेज की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें कथित घटना के समय आरोपियों की मौजूदगी संदिग्ध बताई गई।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता के वकील ने दावा किया कि आरोपियों ने सक्रिय रूप से घटना में भाग लिया और उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

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सुनवाई के दौरान जस्टिस ने CCTV फुटेज का विस्तार से परीक्षण किया।

कोर्ट ने कहा,

“रिकॉर्ड में मौजूद वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि आरोपियों की घटना के दौरान सक्रिय भागीदारी नहीं दिखती।”

कोर्ट ने यह भी पाया कि FIR में आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं, जिनमें किसी आरोपी की स्पष्ट भूमिका नहीं बताई गई।

एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा गया,

“आरोप इतने सामान्य हैं कि किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ अपराध साबित नहीं होता।

कोर्ट ने अपने फैसले में पुराने महत्वपूर्ण फैसले State of Haryana v. Bhajan Lal का हवाला दिया और कहा कि यदि आरोप prima facie अपराध नहीं बनाते या मामला दुर्भावनापूर्ण लगता है, तो कोर्ट कार्यवाही रद्द कर सकता है।

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अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि:

• आरोपों में स्पष्टता की कमी है

• CCTV फुटेज आरोपों का समर्थन नहीं करता

• मामले में व्यक्तिगत विवाद का तत्व मौजूद है

इन आधारों पर कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा जारी रखना “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” होगा।

अंततः कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को आंशिक रूप से रद्द करते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया।

Case Title: Sajal Bose vs The State of West Bengal & Ors.

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