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COFEPOSA मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सोना तस्करी केस में नजरबंदी आदेश बरकरार रखा, याचिकाएं खारिज

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने सोना तस्करी मामले में COFEPOSA के तहत जारी नजरबंदी आदेश को सही ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। - प्रियंका सरकारिया बनाम भारत संघ और अन्य।

COFEPOSA मामला: सुप्रीम कोर्ट ने सोना तस्करी केस में नजरबंदी आदेश बरकरार रखा, याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सोना तस्करी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नजरबंदी आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया का पर्याप्त पालन किया गया है और नजरबंदी आदेश में कोई गंभीर कानूनी खामी नहीं पाई गई।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कथित तौर पर विदेशी सोने की तस्करी से जुड़ा है। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) को सूचना मिली थी कि दुबई से आने वाली एक यात्री के पास सोना हो सकता है। जांच के दौरान बेंगलुरु एयरपोर्ट पर एक महिला यात्री के पास से लगभग 14.2 किलोग्राम विदेशी सोना बरामद किया गया।

जांच में सामने आया कि इस गतिविधि में अन्य व्यक्तियों की भी भूमिका हो सकती है। बाद में एक अन्य आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया। इसके बाद सरकार ने COFEPOSA कानून के तहत दोनों के खिलाफ नजरबंदी आदेश जारी किया।

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याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कई आधारों पर नजरबंदी आदेश को चुनौती दी। उनका कहना था कि सभी जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे प्रभावी जवाब देना मुश्किल हो गया।

इसके अलावा, यह भी तर्क दिया गया कि आरोपियों को एडवाइजरी बोर्ड के सामने वकील की मदद नहीं दी गई, जो उनके अधिकारों का उल्लंघन है।

एक याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि आरोपी का कथित घटनाओं से सीधा संबंध साबित नहीं होता और नजरबंदी का आधार कमजोर है।

पीठ न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

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अदालत ने कहा,

“COFEPOSA कानून के तहत एडवाइजरी बोर्ड के समक्ष वकील के जरिए पेश होने का अधिकार स्वतः नहीं मिलता।”

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इसलिए कि अधिकारियों ने रिकॉर्ड प्रस्तुत किया, यह नहीं माना जा सकता कि उन्होंने सक्रिय रूप से मामले में भाग लिया, जिससे आरोपी को वकील की अनुमति मिलनी चाहिए थी।

दस्तावेजों की आपूर्ति के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि संबंधित सामग्री पर्याप्त रूप से उपलब्ध कराई गई थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी शामिल थे।

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“पेन ड्राइव की सामग्री दिखाने और उसे उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए, जिसे पर्याप्त अनुपालन माना जाएगा,” अदालत ने कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि नजरबंदी आदेश जारी करते समय अधिकारियों ने कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया है और पर्याप्त सामग्री के आधार पर संतुष्टि बनाई गई थी।

अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पहले की गतिविधियों और वर्तमान मामले के बीच “निकट संबंध” (live link) मौजूद है, जिससे नजरबंदी उचित ठहरती है।

अंततः कोर्ट ने दोनों विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को खारिज कर दिया और नजरबंदी आदेश को बरकरार रखा।

Case Title: Priyanka Sarkariya vs Union of India & Anr. (with connected matter)

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