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सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट में पुरुषों को समान तलाक अधिकार देने की मांग वाली PIL खारिज की

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(2)(iii) को जेंडर न्यूट्रल बनाने की मांग वाली PIL खारिज करते हुए इसे व्यक्तिगत विवाद से जुड़ा मामला बताया। - जितेंद्र सिंह बनाम भारत संघ

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट में पुरुषों को समान तलाक अधिकार देने की मांग वाली PIL खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (11 मई) को उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 13(2)(iii) को “जेंडर न्यूट्रल” बनाने की मांग की गई थी। यह प्रावधान फिलहाल केवल पत्नी को यह अधिकार देता है कि वह भरण-पोषण आदेश के बाद एक वर्ष तक साथ न रहने की स्थिति में तलाक मांग सके।

पीठ ने कहा कि याचिका जनहित से अधिक व्यक्तिगत वैवाहिक विवाद से प्रेरित प्रतीत होती है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका कानून के छात्र जितेंद्र सिंह ने दायर की थी। उनका तर्क था कि धारा 13(2)(iii) के तहत मिलने वाला अधिकार केवल महिलाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पुरुषों को भी उपलब्ध होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि इस प्रावधान से उन्हें व्यक्तिगत रूप से क्या परेशानी है। इस पर याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया कि वह पिछले 7-8 वर्षों से वैवाहिक मुकदमेबाजी का सामना कर रहे हैं।

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न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने व्यक्तिगत शिकायतों के लिए जनहित याचिका के अधिकार क्षेत्र के उपयोग पर चिंता व्यक्त की।

पीठ ने टिप्पणी की,

“अनुच्छेद 32 के जरिए व्यक्तिगत बदले की लड़ाई मत लड़िए।”

अदालत ने यह भी कहा कि संविधान महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति देता है। जस्टिस बागची ने कहा,

“Article 15(3) महिलाओं के लिए विशेष कानून बनाने की अनुमति देता है। यह एक विशेष कानून है।”

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानून में व्यापक समानता की मांग है तो यह संसद के विचार का विषय है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका में जनहित का कोई ठोस आधार नहीं बनता और इसे खारिज कर दिया।

Case Details:

Case Title: Jitender Singh v. Union of India

Case Number: W.P.(C) No. 460/2026

Judges: Justice Surya Kant and Justice Joymalya Bagchi

Decision Date: May 11, 2026

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