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भूमि संबंधी दीवानी विवादों में आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ FIR रद्द की

Shivam
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भूमि संबंधी दीवानी विवादों में आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने महिला के खिलाफ FIR रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के फरीदाबाद में दर्ज एक आपराधिक मामले में बड़ी राहत देते हुए एक महिला के खिलाफ FIR रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि भूमि विवाद को आपराधिक मुकदमे में बदलना कानून का दुरुपयोग है, खासकर तब जब मामले की जड़ में पहले से लंबित सिविल विवाद हो।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला FIR संख्या 588/2018 से जुड़ा था, जो 2 जून 2018 को फरीदाबाद सेंट्रल पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर फर्जी जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) तैयार कर जमीन के लेनदेन किए। बाद में पूरक FIR के जरिए सुनीशा आनंद को भी आरोपी बनाया गया।

अपीलकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि पहली FIR में उनका नाम केवल उल्लेखित था, लेकिन उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया था। उन्होंने कहा कि बाद की जांच में कोई नया सबूत सामने नहीं आया, फिर भी उन्हें आरोपी बना दिया गया।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अभिनव बजाज ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान अपीलकर्ता की भूमिका सामने आई, जिसके आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया।

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न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद कहा कि शिकायत में यह स्वयं माना गया है कि GPA अपीलकर्ता और उनकी मां द्वारा ही निष्पादित किए गए थे। ऐसे में इन्हें “फर्जी” या “धोखाधड़ीपूर्ण” कहना समझ से परे है।

पीठ ने कहा,

“हम यह समझने में असमर्थ हैं कि GPA को फर्जी या धोखाधड़ीपूर्ण कैसे कहा जा सकता है, जब स्वयं यह आरोप है कि इन्हें मां और बेटी ने ही निष्पादित किया था।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि यदि विक्रेताओं ने अपनी वास्तविक हिस्सेदारी से अधिक जमीन बेची हो, तो उससे स्वतः आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं होती। अदालत के अनुसार, इस तरह का विवाद मुख्य रूप से सिविल प्रकृति का है।

पीठ ने स्पष्ट कहा,

“क्रिमिनल कानून का इस्तेमाल शुद्ध रूप से सिविल विवाद को आगे बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता।”

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि FIR में ऐसे कोई तथ्य नहीं हैं जिनसे अपीलकर्ता के खिलाफ आपराधिक मंशा या अपराध का प्रथमदृष्टया मामला बनता हो। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि संबंधित भूमि विवाद को लेकर पहले से सिविल मुकदमा लंबित है।

इन परिस्थितियों में अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए सुनीशा आनंद के खिलाफ FIR संख्या 588/2018 को रद्द कर दिया। साथ ही लंबित सभी आवेदन भी निस्तारित कर दिए गए।

Case Details

Case Title: Sunisha Anand v. State of Haryana & Anr.

Case Number: Criminal Appeal No. 2457 of 2026

Judges: Justice Sanjay Kumar and Justice K. Vinod Chandran

Decision Date: May 11, 2026

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