Logo

सबूतों की कड़ी टूटी: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में दोषी ठहराए आरोपी को किया बरी

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हत्या मामले में आरोपी को बरी किया, कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य अधूरे थे और दोष साबित नहीं हुआ। - गौतम सतनामी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य

सबूतों की कड़ी टूटी: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में दोषी ठहराए आरोपी को किया बरी

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ के एक हत्या मामले में आरोपी गौतम सतनामी को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी पूरी तरह साबित नहीं हो सकी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला वर्ष 2011 का है, जब धुम्मन उर्फ सुरजीत भट्टाचार्य की उनके घर में हत्या कर दी गई थी। अभियोजन के अनुसार, आरोपी गौतम सतनामी और मृतक के बीच पुरानी रंजिश थी। घटना से एक दिन पहले दोनों के बीच विवाद और कथित धमकी की बात सामने आई थी।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी थी। इस फैसले को बाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामले की विस्तार से समीक्षा की।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

अदालत ने कहा कि यह पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, जिसमें “हर कड़ी का ठोस और निर्विवाद होना जरूरी है।”

पीठ ने टिप्पणी की,

“सिर्फ शक के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। शक कितना भी मजबूत क्यों न हो, वह सबूत का स्थान नहीं ले सकता।”

अदालत ने ‘लास्ट सीन’ गवाह की गवाही को कमजोर माना। रात के अंधेरे में पहचान की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि यह साक्ष्य निर्णायक नहीं है।

बरामद कुल्हाड़ी और कपड़ों पर मानव रक्त मिलने की बात सामने आई, लेकिन न तो रक्त का ग्रुप तय हुआ और न ही यह साबित हुआ कि वह मृतक का ही था।

अदालत ने कहा,

“जब तक बरामद हथियार और चोटों के बीच स्पष्ट संबंध न हो, उसे निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जा सकता।”

कई गवाह मुकर गए या उन्होंने अभियोजन के दावों की पुष्टि नहीं की। अदालत ने यह भी पाया कि मुख्य गवाह के बयान में देरी और संभावित पक्षपात की संभावना थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और पूर्ण साक्ष्य श्रृंखला स्थापित करने में असफल रहा।

अदालत ने कहा,

"परिस्थितियों की कड़ी अधूरी है और संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए।”

इसी आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए आरोपी गौतम सतनामी को बरी कर दिया। साथ ही, उनके जमानती बांड भी समाप्त कर दिए गए।

Case Details

Case Title: Gautam Satnami vs State of Chhattisgarh

Case Number: Criminal Appeal No. 1782 of 2026 (Arising out of SLP (Crl.) No. 11080/2022)

Judges: Justice Prashant Kumar Mishra and Justice Vipul M. Pancholi

Decision Date: April 7, 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates