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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के दोषी की बेल रद्द की, सजा निलंबन का हाई कोर्ट आदेश खारिज

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के दोषी को दी गई जमानत रद्द कर दी, कहा कि गंभीर मामलों में सजा निलंबन केवल अपवाद के रूप में ही दिया जा सकता है। - धन जी पांडे बनाम बिहार राज्य एवं अन्य

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के दोषी की बेल रद्द की, सजा निलंबन का हाई कोर्ट आदेश खारिज

एक अहम फैसले में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को दी गई जमानत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि गंभीर अपराधों में सजा के बाद जमानत देना सामान्य नियम नहीं हो सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला बिहार के बक्सर जिले में 4 जनवरी 2016 की एक घटना से जुड़ा है। शिकायतकर्ता धन जी पांडेय के अनुसार, उनके भाई की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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एफआईआर में आरोप लगाया गया कि कई आरोपी घटनास्थल पर पहुंचे, मृतक को पकड़ लिया गया और फिर गोली चलाई गई जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

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ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) सहित अन्य धाराओं में दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई।

दोषी ने पटना हाई कोर्ट में अपील दायर की। अपील लंबित रहते हुए, हाई कोर्ट ने 22 नवंबर 2024 को सजा निलंबित करते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया।

इस आदेश को चुनौती देते हुए शिकायतकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि:

• आरोपी हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी ठहराया जा चुका है

• ऐसे मामलों में जमानत अपवाद होनी चाहिए, नियम नहीं

• ट्रायल कोर्ट ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध किया है

• हाई कोर्ट ने साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन (reappreciation) कर गलती की

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दोषी की ओर से कहा गया कि:

• मामला राजनीतिक रंजिश का परिणाम है

• साक्ष्यों में विरोधाभास है

• आरोपी लंबे समय से जेल में है और अपील लंबित है

• हाई कोर्ट ने केवल प्रथम दृष्टया (prima facie) आधार पर राहत दी

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सजा के बाद आरोपी के पक्ष में “निर्दोषता की धारणा” समाप्त हो जाती है।

अदालत ने कहा:

“हत्या जैसे गंभीर मामलों में सजा निलंबन केवल अपवाद स्वरूप ही दिया जाना चाहिए।”

कोर्ट ने यह भी माना कि:

• हाई कोर्ट ने साक्ष्यों का अनुचित तरीके से पुनर्मूल्यांकन किया

• केवल यह कहना कि मुख्य गोली किसी अन्य आरोपी ने चलाई, पर्याप्त नहीं है

• साझा मंशा होने पर सभी आरोपी समान रूप से जिम्मेदार होते हैं

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सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाई कोर्ट का आदेश स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है।

अदालत ने हाई कोर्ट द्वारा दी गई सजा निलंबन और जमानत को रद्द कर दिया।

Case details

Case Title: Dhan Jee Pandey vs The State of Bihar & Another

Case Number: Criminal Appeal No. 1864 of 2026 (arising out of SLP (Crl.) No. 4241 of 2025)

Connected Case: Criminal Appeal No. 1865 of 2026 (arising out of SLP (Crl.) No. 12906 of 2025)

Bench / Judge: Justice R. Mahadevan and Ahsanuddin Amanullah

Decision Date: APRIL 10, 2026

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