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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: होटल मालिक को हाईकोर्ट केस में शामिल करने की अनुमति, पंजाब बिल्डिंग नियम विवाद में राहत

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने होटल कंपनी को हाईकोर्ट केस में शामिल करने की अनुमति दी, कहा कि अंतरिम आदेश से प्रभावित पक्ष को सुनवाई से बाहर नहीं रखा जा सकता। - मेसर्स चोपड़ा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम हरबिंदर सिंह सेखों और अन्य।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: होटल मालिक को हाईकोर्ट केस में शामिल करने की अनुमति, पंजाब बिल्डिंग नियम विवाद में राहत

भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में होटल मालिक कंपनी को हाईकोर्ट में लंबित मामले में पक्षकार बनने की अनुमति दे दी है। अदालत ने माना कि अंतरिम आदेश से सीधे प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई से बाहर नहीं रखा जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला M/s Chopra Hotels Pvt. Ltd. और हरबिंदर सिंह सेखों व अन्य के बीच विवाद से जुड़ा है। कंपनी ने जालंधर में अपने होटल भवन के लिए नियमों के तहत अनुमति और कंप्लीशन सर्टिफिकेट मांगा था।

दिसंबर 2025 में पंजाब सरकार ने नए भवन नियम लागू किए, जिनमें सेटबैक (खाली जगह) की शर्तें कम कर दी गईं। कंपनी का कहना था कि उसका भवन इन नए नियमों के अनुसार वैध है।

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लेकिन पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 24 दिसंबर 2025 के अंतरिम आदेश में इन नए नियमों के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी। इसी आदेश के आधार पर नगर निगम ने भवन को सील कर दिया और बाद में तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी।

कंपनी ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर खुद को उस मामले में पक्षकार बनाने और अंतरिम आदेश में स्पष्टीकरण की मांग की।

लेकिन हाईकोर्ट ने 26 फरवरी 2026 को यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि कंपनी उस मामले में आवश्यक पक्ष नहीं है और अपनी अलग कानूनी प्रक्रिया अपनाए।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें विक्रम नाथ और संदीप मेहता शामिल थे, ने हाईकोर्ट के दृष्टिकोण से असहमति जताई।

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अदालत ने कहा,

“जब किसी अंतरिम आदेश का सीधा असर किसी व्यक्ति पर पड़ रहा हो, तो उसे सिर्फ इसलिए बाहर नहीं रखा जा सकता कि वह मूल याचिका में पक्षकार नहीं था।”

पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे व्यक्ति को कम से कम ‘उचित पक्ष’ (proper party) माना जाना चाहिए ताकि अदालत पूरे मामले को सही ढंग से समझ सके।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि हाईकोर्ट के आदेश का उपयोग नगर निगम ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए किया।

अदालत ने कहा कि:

• कंपनी के आवेदन और संशोधित नक्शे इस आधार पर खारिज किए गए कि नए नियम लागू नहीं हैं

• इससे साफ है कि अंतरिम आदेश का कंपनी पर “सीधा और तत्काल प्रभाव” पड़ा

इसलिए कंपनी को सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए था।

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अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने:

• हाईकोर्ट का 26 फरवरी 2026 का आदेश रद्द कर दिया

• कंपनी को मूल रिट याचिका में पक्षकार बनने की अनुमति दी

• हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि संबंधित सभी मामलों (अपील और रिवीजन) की सुनवाई साथ में लेकिन स्वतंत्र रूप से करे

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि संपत्ति की स्थिति (status quo) बनी रहे जब तक संबंधित अपील और रिवीजन का निपटारा नहीं हो जाता।

साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (merits) पर कोई राय नहीं दी है और सभी मुद्दे खुले रखे हैं।

Case Details

Case Title: M/s Chopra Hotels Private Limited vs Harbinder Singh Sekhon & Ors.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) Nos. 9321–9322 of 2026

Court: Supreme Court of India

Bench / Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: April 8, 2026

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