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नाबालिग को सुने बिना उत्तराधिकार प्रमाणपत्र देना गलत: सुप्रीम कोर्ट ने एक्स-पार्टी आदेश रद्द किया

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग को पक्षकार बनाए बिना दिए गए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र को रद्द करते हुए मामले को पुनः सुनवाई के लिए भेजा। - दीपेश माहेश्वरी एवं अन्य। बनाम रेनू महेश्वरी और अन्य।

नाबालिग को सुने बिना उत्तराधिकार प्रमाणपत्र देना गलत: सुप्रीम कोर्ट ने एक्स-पार्टी आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी नाबालिग कानूनी वारिस को सुने बिना दिया गया उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) कानून के अनुरूप नहीं माना जा सकता। अदालत ने ऐसे मामले में पारित एक्स-पार्टी आदेश को रद्द कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला दिवंगत ओमप्रकाश महेश्वरी के रिटायरमेंट लाभों से जुड़ा था। उनकी बेटियों ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 372 के तहत प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। दूसरी ओर, एक अन्य पक्ष ने दावा किया कि वह भी वैध उत्तराधिकारी है और उसे सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।

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निचली अदालतों सिविल जज, जिला जज और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति संजय करोल शामिल थे, ने पाया कि जिस समय मूल कार्यवाही शुरू हुई, उस समय अपीलकर्ता नाबालिग था।

अदालत ने कहा,

“नाबालिग से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह सार्वजनिक नोटिस देखकर स्वयं अदालत में उपस्थित होकर अपने अधिकारों की रक्षा करे।”

पीठ ने यह भी माना कि संबंधित पक्षों को नाबालिग की जानकारी थी, फिर भी उसे पक्षकार नहीं बनाया गया और उसके लिए कोई अभिभावक नियुक्त नहीं किया गया।

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इसके अलावा, अदालत ने रिकॉर्ड में कई गंभीर त्रुटियों की ओर भी इशारा किया जैसे मृतक की पत्नी के विवरण में गलत जानकारी देना।

अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश 9 नियम 13 CPC के तहत एक्स-पार्टी आदेश को रद्द करने का दायरा व्यापक है और यदि पर्याप्त कारण दिखाया जाए, तो राहत दी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:

• नाबालिग को कार्यवाही से बाहर रखना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

• गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर दिया गया उत्तराधिकार प्रमाणपत्र धारा 383 के तहत रद्द किया जा सकता है।

• निचली अदालतों का यह मानना कि नाबालिग आवश्यक पक्षकार नहीं था, कानूनन गलत है।

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अदालत ने कहा,

“नाबालिग को सुनवाई का अवसर न देना गंभीर कानूनी त्रुटि है और इससे उसे स्पष्ट रूप से नुकसान हुआ है।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपील को स्वीकार करते हुए सभी निचली अदालतों के आदेशों को रद्द कर दिया।

अदालत ने आदेश दिया कि:

• उत्तराधिकार प्रमाणपत्र देने वाला एक्स-पार्टी आदेश निरस्त किया जाता है।

• मामला पुनः संबंधित अदालत में सुनवाई के लिए बहाल किया जाए।

• सभी पक्ष निर्धारित तिथि पर उपस्थित हों।

• निचली अदालत एक वर्ष के भीतर मामले का निपटारा करे।

Case Details

Case Title: Deepesh Maheswari & Anr. vs Renu Maheswari & Ors.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 11006 of 2021

Judges: Justice Sanjay Karol and Justice Augustine George Masih

Decision Date: April 1, 2026

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