Logo

अनावश्यक मुकदमेबाजी के कारण 6 साल तक पेट्रोल पंप ठप्प रहा: सुप्रीम कोर्ट ने NGT के आदेश रद्द किए

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

सुप्रीम कोर्ट ने NGT के आदेश रद्द करते हुए कहा कि पेट्रोल पंप मामले में न्यायिक जिम्मेदारी नहीं निभाई गई और प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां थीं। - इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम दीपक शर्मा और अन्य।

अनावश्यक मुकदमेबाजी के कारण 6 साल तक पेट्रोल पंप ठप्प रहा: सुप्रीम कोर्ट ने NGT के आदेश रद्द किए

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे मामले पर सख्त टिप्पणी की, जिसमें एक पेट्रोल पंप की स्थापना लगभग छह वर्षों तक अटकी रही। अदालत ने कहा कि एक “अनावश्यक हस्तक्षेप” (busybody) के कारण एक सार्वजनिक उपयोगिता परियोजना ठप हो गई।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाम दीपक शर्मा और अन्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) में शिकायत दायर कर आरोप लगाया था कि प्रस्तावित पेट्रोल पंप, स्कूल, गैस एजेंसी और आवासीय क्षेत्र के पास होने के कारण पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करता है।

यह भी कहा गया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों के अनुसार न्यूनतम दूरी का पालन नहीं हुआ।

Read also:- भ्रष्टाचार में दोषी पुलिसकर्मी को बिना नोटिस बर्खास्त करना वैध: गुजरात हाईकोर्ट

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

हालांकि, जांच समितियों की रिपोर्ट में यह सामने आया कि स्थल एक वाणिज्यिक (commercial) क्षेत्र में है और आवश्यक अनुमतियां भी प्राप्त की जा चुकी थीं।

न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने NGT के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा:

“NGT ने अपने न्यायिक अधिकारों का प्रयोग करने के बजाय मामले को समिति पर छोड़ दिया, जो कि कानून के अनुरूप नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विशेषज्ञ समितियों की भूमिका केवल सहायता तक सीमित है, न कि अंतिम निर्णय लेने की।

अदालत ने यह भी पाया कि NGT ने:

• बिना पर्याप्त सुनवाई के आदेश पारित किए

• प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया

• तथ्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं किया

“अदालती प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय आधारभूत सिद्धांत है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता,” पीठ ने टिप्पणी की।

Read also:- चुनाव ड्यूटी में हादसा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा राज्य देगा मुआवजा, बीमा कंपनी नहीं

साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि पेट्रोल पंप CPCB के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता की locus standi (मामला दायर करने का अधिकार) पर भी सवाल उठाया।

कोर्ट ने पाया कि:

• याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि वह प्रभावित क्षेत्र में रहता है

• उसके दावे व्यक्तिगत नुकसान से जुड़े नहीं थे

इस पर अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से याचिका की मंशा पर भी संदेह जताया।

रिकॉर्ड में मौजूद रिपोर्टों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि:

• स्थल वाणिज्यिक क्षेत्र में स्थित है

• कोई मान्य “डिज़ाइनेटेड रेसिडेंशियल एरिया” उल्लंघन में नहीं आता

• दूरी संबंधी नियमों का उल्लंघन सिद्ध नहीं हुआ

इसके अलावा, तीसरी रिपोर्ट में भी यह निष्कर्ष निकला कि सभी आवश्यक मानकों का पालन किया गया है।

Read also:- मूक-बधिर पीड़िता ने गुड़िया के जरिए बताया अपराध, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उम्रकैद बरकरार रखी

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने NGT के 01.02.2021 और 11.11.2022 के आदेशों को रद्द कर दिया।

“हम इन आदेशों को बरकरार नहीं रख सकते,” अदालत ने कहा।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि:

• जिला मजिस्ट्रेट, हरिद्वार मामले की पुनः समीक्षा करें

• वर्तमान कानूनों और अनुमतियों के अनुसार निर्णय लिया जाए

• यदि सभी शर्तें पूरी हों, तो पेट्रोल पंप की स्थापना की अनुमति दी जाए

Case Details

Case Title: Indian Oil Corporation Ltd. v. Deepak Sharma & Ors.

Case Number: Civil Appeal No. 3042 of 2023 (with connected appeals)

Judge: Justice K. Vinod Chandran and Justice Sanjay Kumar

Decision Date: March 23, 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates