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पैसों की मांग को लेकर पत्नी को जिंदा जलाया गया: सुप्रीम कोर्ट ने बेटी के प्रत्यक्षदर्शी बयान और मृत्यु पूर्व बयान पर भरोसा जताया

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सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के एक व्यक्ति की हत्या और क्रूरता के मामले में सजा बरकरार रखते हुए मृतका के मृत्यु से पहले दिया गया बयान और मेडिकल सबूतों को भरोसेमंद माना। - सुब्रमणि बनाम कर्नाटक राज्य

पैसों की मांग को लेकर पत्नी को जिंदा जलाया गया: सुप्रीम कोर्ट ने बेटी के प्रत्यक्षदर्शी बयान और मृत्यु पूर्व बयान पर भरोसा जताया

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के एक व्यक्ति की हत्या और क्रूरता के मामले में सजा बरकरार रखते हुए कहा कि मृतका का मृत्यु से पहले दिया गया बयान (dying declaration) विश्वसनीय था और उसे मेडिकल सबूतों तथा प्रत्यक्षदर्शी गवाही से पूरा समर्थन मिला।

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने आरोपी सुब्रमणि की अपील खारिज कर दी। अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई बरी किए जाने की राहत पलटते हुए उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 498A के तहत दोषी ठहराया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, सुब्रमणि और मृतका चेन्नम्मा की शादी लगभग 17 साल पहले हुई थी। उनके चार बच्चे थे। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपी अक्सर पैसों की मांग को लेकर पत्नी से झगड़ा करता था और उसके साथ मारपीट भी करता था।

20 जुलाई 2000 की रात दोनों के बीच फिर विवाद हुआ। आरोप है कि आरोपी बाहर से मिट्टी का तेल लेकर आया, पत्नी पर तेल डाला और उसे आग लगा दी। गंभीर रूप से झुलसी महिला को अस्पताल ले जाया गया, जहां चार दिन बाद उसकी मौत हो गई।

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ट्रायल कोर्ट ने सबूतों में संदेह जताते हुए आरोपी को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि इतने अधिक जलने के बाद मृतका बयान देने की स्थिति में नहीं रही होगी। बाद में राज्य सरकार की अपील पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह फैसला पलट दिया और आरोपी को दोषी ठहराया।

सुप्रीम कोर्ट ने दंपति की बड़ी बेटी की गवाही को बेहद महत्वपूर्ण माना। घटना के समय उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष थी। उसने अदालत में कहा कि उसके पिता ने झगड़े के बाद मिट्टी का तेल लाकर उसकी मां पर डाला और आग लगा दी। इसके बाद वह घर से भाग गया।

पीठ ने कहा कि गवाह के बयान में कोई बड़ी विरोधाभास नहीं है और ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि वह अपने पिता के खिलाफ झूठ बोले।

अदालत ने अस्पताल में दर्ज मृतका के बयान और डॉक्टरों की गवाही पर भी भरोसा जताया। डॉक्टरों ने बताया कि महिला लगभग 80-90 प्रतिशत तक झुलसी हुई थी, लेकिन वह होश में थी और बयान देने की स्थिति में थी।

पीठ ने कहा,

“रिकॉर्ड पर ऐसा कोई प्रतिकूल तथ्य नहीं है जिससे यह माना जाए कि dying declaration सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया।”

फैसले में यह भी दर्ज है कि मृतका ने बयान में कहा था कि उसका पति अक्सर पैसों को लेकर झगड़ा करता था और घटना वाली रात उसने जान से मारने की धमकी देकर आग लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि घटनास्थल से मिट्टी के तेल का डिब्बा, माचिस और जले हुए कपड़े बरामद हुए थे, जो अभियोजन पक्ष की कहानी को मजबूत करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटना पूरी तरह उचित था क्योंकि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त और मजबूत सबूत मौजूद थे।

अदालत ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए उसे शेष सजा काटने के लिए तुरंत सरेंडर करने का निर्देश दिया।

Case Details:

Case Title: Subramani vs State of Karnataka

Case Number: Criminal Appeal No. 2432 of 2010

Judges: Justice Pankaj Mithal and Justice S.V.N. Bhatti

Decision Date: March 17, 2026

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