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सुप्रीम कोर्ट ने उर्वरक उत्पादन में प्रयुक्त नेफ्था पर उत्पाद शुल्क की मांग को रद्द कर दिया।

Shivam
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सर्वोच्च न्यायालय ने उत्पाद शुल्क छूट में "इच्छित उपयोग" को स्पष्ट करते हुए आरसीएफ की अपील को स्वीकार कर लिया और नेफ्था के कथित गबन से संबंधित शुल्क की मांग को खारिज कर दिया। - मेसर्स राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड बनाम केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर आयुक्त

सुप्रीम कोर्ट ने उर्वरक उत्पादन में प्रयुक्त नेफ्था पर उत्पाद शुल्क की मांग को रद्द कर दिया।

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने उर्वरक निर्माता कंपनी राष्ट्रिय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (RCF) से जुड़े लंबे समय से चल रहे केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) विवाद में अहम फैसला सुनाया। मामला इस बात पर केंद्रित था कि क्या कंपनी द्वारा बिना ड्यूटी के खरीदा गया नाफ्था वास्तव में “निर्धारित उपयोग” (intended use) के लिए ही इस्तेमाल हुआ था या नहीं।

मामले की पृष्ठभूमि

वर्ष 2001 में केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग ने RCF के संयंत्र का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि कंपनी नाफ्था को बिना एक्साइज ड्यूटी के खरीद रही थी, यह दावा करते हुए कि इसका उपयोग उर्वरक निर्माण में किया जा रहा है।

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हालांकि, विभाग का आरोप था कि यही नाफ्था बिजली उत्पादन, केमिकल निर्माण और अन्य गैर-उर्वरक गतिविधियों में भी उपयोग हो रहा था। इसके आधार पर लगभग ₹28.55 करोड़ की ड्यूटी की मांग की गई।

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मामला कई स्तरों से गुजरते हुए CESTAT और बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुँचा।

• CESTAT ने ड्यूटी और पेनल्टी को बरकरार रखा

• हाई कोर्ट ने भी CESTAT के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया

इसके बाद RCF ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान, जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया:

‘Intended Use’ का अर्थ

अदालत ने स्पष्ट किया कि छूट (exemption) का लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि वस्तु किस उद्देश्य से खरीदी गई थी, न कि केवल उसके अंतिम उपयोग पर।

“छूट का उद्देश्य यह देखना है कि वस्तु का उपयोग किस इरादे से किया गया था,” अदालत ने कहा।

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मिश्रित उपयोग की स्थिति

कोर्ट ने माना कि नाफ्था और प्राकृतिक गैस एक साथ उपयोग होते थे, जिससे यह तय करना मुश्किल था कि कौन सा हिस्सा किस प्रक्रिया में गया।

कोई स्पष्ट दुरुपयोग नहीं

अदालत ने पाया कि:

• नाफ्था की मात्रा खुद उर्वरक उत्पादन के लिए ही पर्याप्त नहीं थी

• कंपनी ने सभी प्रक्रियात्मक शर्तों का पालन किया था

विस्तारित समय सीमा (Extended Limitation)

कोर्ट ने कहा कि विभाग द्वारा 5 साल की विस्तारित समय सीमा लागू करने के लिए “जानबूझकर छिपाने” (suppression) का ठोस प्रमाण जरूरी है।

“सिर्फ अनुमान के आधार पर दंड या विस्तारित सीमा लागू नहीं की जा सकती,” पीठ ने टिप्पणी की।

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सुप्रीम कोर्ट ने:

• CESTAT और adjudicating authority के आदेशों को निरस्त कर दिया

• यह माना कि RCF छूट का लाभ लेने के लिए पात्र था

• विभाग द्वारा लगाई गई ड्यूटी और पेनल्टी को अस्थिर कर दिया

साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि मुख्य विवाद ही समाप्त हो गया है, इसलिए संबंधित अपीलें स्वतः निरर्थक (infructuous) हो जाती हैं।

Case Details

Case Title: M/s Rashtriya Chemicals and Fertilizers Ltd vs Commissioner of Central Excise & Service Tax

Case Number: Civil Appeal Nos. 2219–2220 of 2013 & connected appeal (2026)

Judge: Justice Ujjal Bhuyan and Justice Manoj Misra

Decision Date: 24 March 2026

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