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मणिपुर हिंसा मामलों में सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पीड़ितों को मुफ्त वकील और गुवाहाटी ट्रायल में भाग लेने के लिए यात्रा खर्च मिलेगा

Vivek G.
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डिंगांगलुंग गंगमेई बनाम मुटुम चुरामनी मीतेई और अन्य।, मणिपुर हिंसा मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों को मुफ्त कानूनी सहायता और गुवाहाटी ट्रायल में भाग लेने के लिए यात्रा खर्च देने का निर्देश दिया।

मणिपुर हिंसा मामलों में सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पीड़ितों को मुफ्त वकील और गुवाहाटी ट्रायल में भाग लेने के लिए यात्रा खर्च मिलेगा

मणिपुर में हुई हिंसा और उससे जुड़े गंभीर अपराधों की जांच और ट्रायल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि जिन मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं, उन मामलों के पीड़ितों और उनके परिवारों को ट्रायल में भाग लेने के लिए कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कई याचिकाएं मणिपुर में हुई हिंसा से जुड़े अपराधों की जांच और ट्रायल को लेकर लंबित हैं। अदालत ने पहले ही कुछ मामलों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी और कई मामलों के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए थे।

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पूर्व महाराष्ट्र डीजीपी दत्तात्रेय पडसालगीकर को इन जांचों की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया था ताकि जांच निष्पक्ष और समयसीमा के भीतर पूरी हो सके।

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कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कई पीड़ित और उनके परिवार इस बात से भी अनजान हैं कि उनके मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं, क्योंकि वे अभी भी मणिपुर में हैं जबकि ट्रायल गुवाहाटी की अदालत में चल रहा है।

पीठ ने कहा,“पीड़ितों और उनके परिवारों को आरोपपत्र की प्रतियां मिलनी चाहिए और उन्हें ट्रायल की कार्यवाही में भाग लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

अदालत ने मणिपुर और असम राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि हर पीड़ित या उनके परिवार को एक कानूनी सहायता वकील उपलब्ध कराया जाए।

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साथ ही अदालत ने कहा कि यदि वकील मणिपुर से नियुक्त होता है, तो उसके यात्रा और ठहरने का खर्च भी विधिक सहायता के तहत दिया जाएगा।

पीड़ित या उनके साथ एक परिवार सदस्य को भी गुवाहाटी में चल रहे ट्रायल में शामिल होने के लिए यात्रा और रहने का खर्च दिया जाएगा। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि पीड़ितों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी दर्ज किए जा सकते हैं।

Case Title: Dinganglung Gangmei v. Mutum Churamni Meetei & Ors.

Case No.: SLP (C) Diary No. 19206/2023

Decision Date: 26 February 2026

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