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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान को सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को शामिल करने का निर्देश दिया है।

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को मातृभाषा आधारित शिक्षा नीति लागू करने और चरणबद्ध तरीके से स्कूलों में राजस्थानी भाषा शुरू करने का निर्देश दिया। - पदम मेहता और अन्य बनाम राजस्थान राज्य और अन्य

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान को सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी भाषा को शामिल करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए राजस्थान सरकार को राजस्थानी भाषा को स्कूल शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने के लिए व्यापक नीति बनाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति की अपनी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि उसकी पहचान और समाज में सार्थक भागीदारी का आधार होती है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ताओं ने राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर मांग की थी कि REET-2021 परीक्षा में शिक्षक भर्ती के लिए राजस्थानी भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। साथ ही उन्होंने स्कूलों में बच्चों को राजस्थानी या स्थानीय भाषा में शिक्षा देने की मांग भी की थी।

हाईकोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि याचिकाकर्ता कोई ऐसा कानूनी अधिकार साबित नहीं कर सके, जिसके आधार पर राज्य को बाध्य किया जा सके। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शिक्षा तभी सार्थक हो सकती है जब बच्चा पढ़ाई को समझ सके। अदालत ने टिप्पणी की,

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“भाषा केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के अस्तित्व और पहचान से जुड़ा अधिकार है।”

पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a), 21A और 350A सहित कई प्रावधान मातृभाषा आधारित शिक्षा की आवश्यकता को मान्यता देते हैं। अदालत ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का भी उल्लेख किया, जिनमें प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में देने पर जोर दिया गया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि बच्चे को ऐसी भाषा में पढ़ाया जाए जिसे वह ठीक से समझ नहीं पाता, तो शिक्षा का उद्देश्य ही प्रभावित होता है।

सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार ने कहा कि फिलहाल केवल संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं को ही स्कूलों में पढ़ाया जाता है और राजस्थानी उस सूची में शामिल नहीं है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य का यह दृष्टिकोण “अत्यधिक तकनीकी और संकीर्ण” है। अदालत ने कहा कि जब राजस्थान की कई यूनिवर्सिटियों में राजस्थानी भाषा पढ़ाई जा रही है, तब यह कहना उचित नहीं कि भाषा का शैक्षणिक आधार नहीं है।

पीठ ने कहा,

“कागजों पर मौजूद अधिकार, यदि जमीन पर लागू न हों, तो उनका कोई वास्तविक अर्थ नहीं रह जाता।”

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह मातृभाषा आधारित शिक्षा लागू करने के लिए व्यापक नीति तैयार करे। अदालत ने कहा कि राजस्थानी भाषा को स्थानीय और क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता देकर स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सरकारी और निजी दोनों प्रकार के स्कूलों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में शुरू करने के लिए समयबद्ध कदम उठाए जाएं।

राजस्थान सरकार को 25 सितंबर 2026 तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

Case Details

Case Title: Padam Mehta and Another v. State of Rajasthan and Others

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 1425 of 2025

Judges: Justice Vikram Nath and Justice Sandeep Mehta

Decision Date: May 12, 2026

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