Logo

सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश: 'वेंडेटा नहीं चलेगी' - कैप्टन प्रमोद बाजाज केस में चयन प्रक्रिया रद्द

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

कैप्टन प्रमोद कुमार बजाज बनाम भारत संघ, सुप्रीम कोर्ट ने कैप्टन प्रमोद बाजाज मामले में सरकार की कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण बताया। ITAT चयन रद्द कर नई समिति बनाने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश: 'वेंडेटा नहीं चलेगी' - कैप्टन प्रमोद बाजाज केस में चयन प्रक्रिया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बेहद कड़े और अहम फैसले में कहा कि किसी अधिकारी के साथ व्यक्तिगत दुश्मनी या पूर्वाग्रह के आधार पर प्रशासनिक निर्णय नहीं लिए जा सकते।

कोर्ट ने आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के सदस्य पद से जुड़ा मामला सुनते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि पूरी प्रक्रिया दुर्भावना और पक्षपात से प्रभावित रही।

यह मामला रिटायर्ड सेना अधिकारी और पूर्व आयकर आयुक्त कैप्टन प्रमोद कुमार बाजाज से जुड़ा है, जिन्हें बार-बार चयन के बावजूद नियुक्ति से वंचित किया गया।

Read also:-सुप्रीम कोर्ट ने भूमि मुआवजा बहाल किया, कहा– कुछ मामलों की वजह से पूरी अवॉर्ड रद्द नहीं हो सकती

पृष्ठभूमि | कैसे शुरू हुआ विवाद

कैप्टन प्रमोद बाजाज भारतीय सेना से मेडिकल कारणों से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और 1990 बैच के IRS अधिकारी बने।

उनका रिकॉर्ड बेदाग रहा और 2012 में वे कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स बने।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

2014 में उन्होंने ITAT के सदस्य पद के लिए आवेदन किया।

• Search-cum-Selection Committee (SCSC) ने उन्हें ऑल इंडिया रैंक-1 पर रखा।

• इसके बावजूद नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया।

सरकार ने इंटेलिजेंस रिपोर्ट, विजिलेंस क्लियरेंस और बाद में विभागीय कार्यवाही का हवाला देकर मामला लटकाए रखा।

लंबा संघर्ष और अदालतों की दखल

कैप्टन बाजाज ने कई बार CAT, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

• CAT ने उनके पक्ष में आदेश दिया

• हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई

• सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में कहा – नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए

Read also:- परंपरा से ऊपर संविधान: हाईकोर्ट ने कहा-गैर-पैतृक जमीन बेचने पर विधवा की सहमति पर्याप्त

इसके बावजूद:

• उन्हें जबरन रिटायर किया गया

• चार्जशीट दी गई

• प्रमोशन रोका गया

• और बार-बार चयन प्रक्रिया टाली गई

2023 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि:

“यह कार्रवाई सार्वजनिक हित नहीं बल्कि प्रतिशोध से प्रेरित प्रतीत होती है।”

कोर्ट की सख्त टिप्पणी | ‘यह खुली मनमानी है’

इस बार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया।

कोर्ट ने कहा -

“यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि जानबूझकर किए गए उत्पीड़न का है।”

पीठ ने पाया कि:

• जिस अधिकारी के खिलाफ पहले अवमानना कार्यवाही चली थी

• वही अधिकारी चयन समिति में बैठा

• और उसी समिति ने याचिकाकर्ता को अयोग्य ठहरा दिया

कोर्ट ने कहा कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।

Read alos:-सुप्रीम कोर्ट ने श्रम विवाद की राह नहीं रोकी, कहा– बिना डिमांड नोटिस भी हो सकती है सुलह प्रक्रिया

अदालत का फैसला | क्या आदेश दिया गया

सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए:

1. 1 सितंबर 2024 की चयन समिति की बैठक रद्द

2. नई चयन समिति गठित की जाए

3. विवादित अधिकारी को समिति से बाहर रखा जाए

4. चार हफ्तों में नई बैठक हो

5. दो हफ्तों में परिणाम घोषित किया जाए

6. केंद्र सरकार पर ₹5 लाख का जुर्माना

7. राशि सीधे याचिकाकर्ता को दी जाए

कोर्ट ने कहा:

“न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।”

क्यों अहम है यह फैसला

यह फैसला सिर्फ एक अफसर की नियुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह बताता है कि:

• चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता जरूरी है

• सरकारी अफसर व्यक्तिगत दुर्भावना से काम नहीं कर सकते

• अदालतें प्रशासनिक मनमानी पर चुप नहीं बैठेंगी

Case Title: Captain Pramod Kumar Bajaj vs Union of India

Case No.: Writ Petition (Civil) No. 1180 of 2025

Decision Date: 30 January 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates