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UGC के नए इक्विटी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, बोले CJI-‘भाषा अस्पष्ट है, दुरुपयोग की आशंका’

Vivek G.
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मृत्युंजय तिवारी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य। विनीत जिंदल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य। राहुल दीवान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य। सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए इक्विटी नियमों पर रोक लगाई। कोर्ट ने कहा नियम अस्पष्ट हैं और दुरुपयोग की आशंका है। 2012 नियम लागू रहेंगे।

UGC के नए इक्विटी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, बोले CJI-‘भाषा अस्पष्ट है, दुरुपयोग की आशंका’

नई दिल्ली में गुरुवार को उच्चतम न्यायालय ने उच्च शिक्षा से जुड़े एक अहम मुद्दे पर बड़ा हस्तक्षेप किया। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जनवरी 2026 में लागू किए गए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने इन नियमों को “अस्पष्ट” और “दुरुपयोग योग्य” बताते हुए केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया है।

मामले की पृष्ठभूमि

UGC ने 23 जनवरी 2026 को नए नियम अधिसूचित किए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना बताया गया था। लेकिन इन नियमों को लेकर देशभर में विरोध शुरू हो गया।

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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इन नियमों में “जाति आधारित भेदभाव” की परिभाषा केवल SC, ST और OBC तक सीमित कर दी गई है, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों को संरक्षण से बाहर कर दिया गया है।

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इन नियमों को चुनौती देते हुए तीन याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गईं -

• मृ्त्युंजय तिवारी

• अधिवक्ता विनीत जिंदल

• राहुल दीवान

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान नियमों पर गंभीर सवाल उठाए।

CJI सूर्यकांत ने कहा,“हम अभी केवल इसकी संवैधानिकता की प्रारंभिक जांच कर रहे हैं। भाषा में स्पष्टता नहीं है और इसमें दुरुपयोग की पूरी संभावना है।”

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पीठ ने यह भी कहा कि “हम एक ऐसा शैक्षणिक माहौल चाहते हैं जो स्वतंत्र, समावेशी और समान हो। भारत की एकता हमारे शिक्षण संस्थानों में भी दिखनी चाहिए।”

कोर्ट ने खास तौर पर Regulation 3(1)(c) पर सवाल उठाया, जिसमें जाति-आधारित भेदभाव को केवल आरक्षित वर्गों तक सीमित किया गया है।

‘क्या हम फिर से पीछे जा रहे हैं?’ - कोर्ट की चिंता

सुनवाई के दौरान CJI ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा,

“क्या हम एक जाति-विहीन समाज की ओर बढ़ने के बजाय पीछे जा रहे हैं?”

उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग जातियों के लिए अलग हॉस्टल जैसी सोच समाज को और बांट सकती है। “भगवान के लिए ऐसा मत कीजिए। हम सब साथ रहते आए हैं। अंतरजातीय विवाह भी हो रहे हैं,” CJI ने कहा।

न्यायमूर्ति बागची ने जोड़ा, “जब 2012 के नियम ज्यादा व्यापक और समावेशी थे, तो फिर पीछे क्यों जाया जा रहा है?”

रैगिंग और भेदभाव पर सवाल

कोर्ट ने यह भी पूछा कि नए नियमों में रैगिंग को क्यों शामिल नहीं किया गया।

एक याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यदि कोई सामान्य वर्ग का छात्र रैगिंग का शिकार होता है, तो मौजूदा नियमों में उसके लिए कोई प्रभावी उपाय नहीं है।

इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल जाति के आधार पर भेदभाव की कल्पना करना व्यावहारिक नहीं है।

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कोर्ट का अंतिम आदेश

सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया-

“UGC के 2026 के नियमों को फिलहाल स्थगित किया जाता है। जब तक अगला आदेश न हो, 2012 के नियम ही लागू रहेंगे।”

साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी कर 19 मार्च तक जवाब मांगा है।

Case Title:

• Mritunjay Tiwari vs Union of India & Ors.

• Vineet Jindal vs Union of India & Ors.

• Rahul Dewan vs Union of India & Ors.

Case Number:

• W.P.(C) No. 101/2026

• W.P.(C) No. 109/2026

• W.P.(C) No. 108/2026

Case Type:

• Constitutional Challenge – UGC Regulations

Decision Date:

• 30 January 2026

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